
अमेरिका में रिपब्लिकन पार्टी को मिली करारी चुनावी हार के बाद, ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने अमेरिकी नेतृत्व की तीखी आलोचना की है। उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे 'हारने वाले जुआरी' जैसी मानसिकता के साथ बातचीत की मेज पर आए हैं, जबकि अमेरिका खुद 'इजरायल-फर्स्ट' (इजरायल को प्राथमिकता देने वाली) नीति के कारण एक खतरनाक मोड़ पर खड़ा है।
X (ट्विटर) पर एक पोस्ट में गालीबाफ ने लिखा, "हारने वाले जुआरी जैसी मानसिकता- ये लोग बातचीत की मेज से उठकर जाना ही नहीं चाहते। एक तरफ अमेरिका 'इजरायल-फर्स्ट' नीति के चलते खतरनाक स्थिति में है, तो दूसरी तरफ उनका 'बॉस' युद्ध के अगले चरण की तैयारी कर रहा है। ये 'TED टॉक' (ज्ञान देने वाली बातें) बंद करें। अपने बॉस से ये बातें क्यों नहीं कहते?"
गालीबाफ की यह टिप्पणी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के एक बयान के बाद आई है। वेंस ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान के साथ युद्ध, रिपब्लिकन पार्टी की 2026 के मध्यावधि चुनावों में हुई भारी हार का मुख्य कारण था। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भी यही राय है। साथ ही, उन्होंने रूढ़िवादी मतदाताओं से अपनी निराशा को आने वाले चुनावों में बदलने की अपील की।
चुनाव परिणामों पर चर्चा करते हुए वेंस ने एक पोस्ट में बताया कि उनके आंतरिक डेटा से पता चला है कि रूढ़िवादी मतदाताओं की भागीदारी काफी अच्छी रही। उन्होंने लिखा, "हमारी टीम के डेटा विश्लेषकों ने 'मतदाताओं की संरचना' (composition) पर बहुत ध्यान दिया—यानी क्या मतदाता आधार 2024 जैसा था, जिससे रिपब्लिकन जीत सकें? भले ही कुछ पोल में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत दिखाई जा रही थी, लेकिन हमारा डेटा लगातार यही बता रहा था कि कुछ राज्यों में मतदान ठीक-ठाक रहा, कुछ में बहुत शानदार रहा, और किसी भी राज्य में स्थिति खराब नहीं थी। हमारी टीम में एक वास्तविक उम्मीद थी: हमारे समर्थक बड़ी संख्या में वोट डालने आ रहे थे।"
हालांकि, वेंस ने यह भी बताया कि डेटा विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दे दी थी कि केवल अधिक मतदान से जीत पक्की नहीं होगी, क्योंकि 2024 में ट्रम्प-वेंस को वोट देने वाले मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा इस बार डेमोक्रेट्स को वोट देने का इरादा रखता था।