ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। रिसर्च-आधारित रैंकिंग में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पिछड़ गई है, जबकि चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है।
वैश्विक उच्च शिक्षा परिदृश्य में बड़ा बदलाव सामने आया है। हाल में जारी रिसर्च-आधारित ग्लोबल यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पिछड़ गई है, जबकि चीन की झेजियांग यूनिवर्सिटी शीर्ष स्थान पर पहुंच गई है। दशकों तक अकादमिक उत्कृष्टता और वैश्विक रिसर्च नेतृत्व का प्रतीक रही हार्वर्ड के लिए यह बदलाव चौंकाने वाला माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ प्रमुख रिसर्च-केंद्रित रैंकिंग में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी तीसरे स्थान तक फिसल गई है। यह परिवर्तन चीन द्वारा उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान में किए गए बड़े और निरंतर निवेश का परिणाम माना जा रहा है। नई रैंकिंग का आधार प्रकाशित शोध, वैज्ञानिक लेखों की संख्या और उन पर मिलने वाले साइटेशन हैं, जिनमें चीनी विश्वविद्यालयों ने खासकर विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में तेज प्रगति दर्ज की है। शिक्षा जगत में इसे वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरीकी विश्वविद्यालयों को रिसर्च फंडिंग में अनिश्चितता, सख्त इमिग्रेशन नियमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बढ़ती पाबंदियों जैसी नीतिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे शोध की रफ्तार प्रभावित हो रही है। इसके उलट चीन की स्पष्ट शिक्षा नीति और दीर्घकालिक निवेश ने उसके विश्वविद्यालयों को मजबूती दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अमरीका के बाहर भी विश्वस्तरीय अवसरों के विस्तार का संकेत है।