ये ज्वालामुखी प्रतिदिन करीब छह हजार डॉलर मूल्य यानी लगभग 5 लाख रुपए का गोल्ड डस्ट (सोने की धूल) उत्सर्जित कर रही है। नासा (NASA) की अर्थ ऑब्जर्वेट्री की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सोने के कण माउंट एरेबस से 621 मील की दूरी तक पाए गए। इसकी वजह ज्वालामुखी से निकली गैस काफी दूर तक जाती है।
अंटार्कटिका (Antarctica) का सबसे ऊंचा सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एरेबस गैसों के साथ सोना भी उगल रहा है। सोने की मात्रा 2.8 औंस (80 ग्राम) प्रतिदिन है। रोस द्वीप पर स्थित इस ज्वालामुखी (Mount Erebus) से सोने का यह उत्सर्जन पिछले अनुमानों के मुताबिक ही है, जिसका 1991 में अमरीकी भूवैज्ञानिकों ने उल्लेख किया था। न्यू मैक्सिको इंस्टीट्यूट ऑफ माइनिंग एंड टेक्नोलॉजी के फिलिप काइल ने बताया कि संभव है सोने के ये कण (Gold Dust) ज्वालामुखी चट्टान से उत्पन्न हुए हों। ज्वालामुखी गतिविधि के दौरान माउंट ऐरेबस गर्म गैस और लावा उत्सर्जित करता है। काइल ने बताया, ज्वालामुखी गैसों में 0.1 से 20 माइक्रोमीटर और बर्फ में लगभग 60 माइक्रोमीटर सोने के कणों का आकार होता है।
इस ज्वालामुखी के निकट 28 नवंबर 1979 में उस वक्त बड़ा हादसा हुआ, जब न्यूजीलैंड की एयर 901 उड़ान दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हदसे में सभी 237 यात्री और 20 चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी। ये उड़ान अंटार्कटिका के दर्शनीय स्थानों को दिखाने के लिए रवाना हुई थी।
अंटार्कटिका में रॉस द्वीप पर स्थित माउंट एरेबस क्षेत्र के 138 सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है। शोधकर्ताओं का कहना है, ज्वालामुखी प्रतिदिन करीब छह हजार डॉलर मूल्य की गोल्ड डस्ट (स्वर्ण धूल) उत्सर्जित कर रही है। नासा की अर्थ ऑब्जर्वेट्री की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक सोने के कण माउंट एरेबस से 621 मील की दूरी तक पाए गए। इसकी वजह ज्वालामुखी से निकली गैस काफी दूर तक जाती है। कोलंबिया विश्वविद्यालय में लामोंट डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के कॉनर बेकन का कहना है कि माउंट ऐरेबस में यह विस्फोट 1972 से हो रहे हैं। इसके चलते इसके शिखर के नजदीक एक झील भी बन गई।