
Artificial Intelligence: बच्चों की पढ़ाई आसान बनाने के लिए स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ ) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन क्या यह तकनीक बच्चों को बेहतर सीखने में मदद कर रही है या उनकी सोचने-समझने की क्षमता कमजोर कर रही है? अमरीका में इसी सवाल पर बहस तेज हो गई है। अमरीकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल और जोश हॉली ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को पत्र लिखकर एआइ टूल्स के बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शैक्षणिक विकास पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर 9 तीखे सवाल पूछे हैं।
सांसदों का आरोप है कि गूगल अपने एआइ उत्पादों को स्कूलों में तेजी से पहुंचा रहा है। कई स्कूलों में क्रोमबुक और गूगल क्लासरूम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए इनकी पहुंच बढ़ी है। सांसदों ने एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें 60 से अधिक शिक्षकों, अभिभावकों, विद्यार्थियों और चिकित्सकों से बातचीत में कुछ विद्यार्थियों के एआइ पर शैक्षणिक और भावनात्मक निर्भरता के मामले सामने आए।
हर सवाल का तैयार जवाब मिलने से बच्चे खुद सोचने, गणना करने और समस्या सुलझाने का अभ्यास छोड़ सकते हैं। गलत जानकारी, निजता का खतरा और चैटबॉट से भावनात्मक लगाव भी गंभीर चुनौतियां हैं। ओईसीडी की 2026 की रिपोर्ट भी आगाह करती है कि एआइ से तैयार बेहतर उत्तर का अर्थ यह नहीं कि विद्यार्थी ने विषय को वास्तव में सीख लिया है।