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Pakistan Education System: पाकिस्तान की उच्च शिक्षा व्यवस्था गंभीर वित्तीय और शैक्षणिक संकट से गुजर रही है। करीब दो दशक पहले तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने देश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की स्थिति बदलने के लिए बड़े सुधारों की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को बेहतर बनाकर उन्हें 'उत्कृष्टता के केंद्र' (Centres of Excellence) के रूप में विकसित करना था। लेकिन अब इन सुधारों की सफलता पर सवाल उठ रहे हैं।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 280 विश्वविद्यालय हैं और लाखों छात्र उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। देश में शोध कार्यों का दायरा भी बढ़ा है, लेकिन इसके बावजूद विश्वविद्यालय बढ़ते कर्ज, कमजोर शैक्षणिक नतीजों और शोध की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों से जूझ रहे हैं। कई संस्थानों के लिए अपने संचालन को जारी रखना भी मुश्किल होता जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के नाम पर बड़े पैमाने पर निवेश किया गया। नए विश्वविद्यालय स्थापित किए गए और अमेरिका के साथ एक महत्वपूर्ण समझौते के तहत दुनिया के सबसे बड़े फुलब्राइट स्कॉलरशिप कार्यक्रमों में से एक शुरू किया गया। इन पहलों से उम्मीद थी कि पाकिस्तान में उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा मिलेगी। हालांकि, दशकों बाद भी ये प्रयास अपेक्षित नतीजे नहीं दे पाए। रिपोर्ट में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों का तेजी से हुआ विस्तार अब खुद उनके लिए आर्थिक बोझ बन गया है।
पाकिस्तान में विश्वविद्यालयों की खराब आर्थिक स्थिति का मामला राष्ट्रीय मीडिया में भी चर्चा का विषय बना है। रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा के लगभग सभी सरकारी विश्वविद्यालय गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।
इन संस्थानों ने पूरे उच्च शिक्षा क्षेत्र को राहत देने के लिए करीब 25 अरब पाकिस्तानी रुपये के पैकेज की मांग की है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विश्वविद्यालयों के सामने आर्थिक चुनौतियां कितनी गंभीर हो चुकी हैं।
रिपोर्ट में 2002 में शुरू किए गए सुधारों की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। उस समय इन सुधारों का लक्ष्य पाकिस्तान को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था (Knowledge Economy) में बदलना था।
डॉन की रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन सुधारों से देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की उम्मीद थी, वे अब एक ऐसी विशाल व्यवस्था में बदल गए हैं, जिसे संभालना मुश्किल हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह व्यवस्था इतनी बड़ी हो चुकी है कि इसे विफल होने देना आसान नहीं है और इसमें सुधार करना भी कठिन होता जा रहा है।
रिपोर्ट का एक अहम पहलू यह भी है कि उच्च शिक्षा सुधारों के मूल योजनाकारों ने शुरुआत में ही संभावित संकट को लेकर चेतावनी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, 2002 की टास्क फोर्स रिपोर्ट में उच्च शिक्षा सुधारों से जुड़ी चुनौतियों और संभावित समस्याओं का जिक्र किया गया था। यही दस्तावेज आगे चलकर हायर एजुकेशन कमीशन (HEC) ऑर्डिनेंस और हायर एजुकेशन कमीशन के गठन का आधार बना।
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के उच्च शिक्षा क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं की पड़ताल की गई है। इसमें बताया गया है कि बड़े निवेश और महत्वाकांक्षी सुधारों के बावजूद विश्वविद्यालयों की वित्तीय स्थिरता, शिक्षा की गुणवत्ता और शोध के स्तर से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।
Updated on:
1 Nov 2026, 10:58 PM IST
Published on:
1 Nov 2026, 10:58 PM IST
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