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H-1B वीजा पर भारी शुल्क की तैयारी में अमेरिका, भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है बड़ा असर

H-1B visa fee hike: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा शुल्क बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने की तैयारी में है। जानें नए प्रस्ताव का भारतीय पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा।
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Aug 25, 2026
US proposes raising H-1 B visa fee
एक अनुमान के मुताबिक, अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से अधिक लोग रहते हैं। (प्रतीकात्मक तस्वीर- Patrika)

H-1B visa $103,265 fee: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन H-1B वीजा पर मौजूदा एक लाख डॉलर के शुल्क को बढ़ाकर 1,03,265 डॉलर करने की तैयारी में है। इस कदम से अमेरिका में विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की लागत काफी बढ़ सकती है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है, जब राष्ट्रपति ट्रंप प्रशासन की ओर से पिछले साल लगाए गए एक लाख डॉलर के शुल्क को फेडरल कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अमेरिकी अदालत ने इस शुल्क को गैरकानूनी करार देते हुए इस साल जून में इसके खिलाफ फैसला सुनाया था।

फेडरल रजिस्टर में नियम प्रकाशित

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) की ओर से प्रस्तावित नई फीस को सोमवार को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया गया। इस पर अगले 30 दिनों तक जनता की राय मांगी गई है। माना जा रहा है कि इस नियम को इस साल के अंत तक अंतिम रूप दिया जा सकता है। यहां आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप का मौजूदा शुल्क वाला आदेश सितंबर में समाप्त होने जा रहा है। ऐसे में उन्होंने डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी को इसे स्थायी रूप देने की दिशा में काम करने का निर्देश दिया है।

DHS के प्रस्ताव में कहा गया है कि नए शुल्क का उद्देश्य 'राजस्व जुटाना' है। इससे अमेरिकी सरकार के विभिन्न विभागों और एजेंसियों में कानूनी आव्रजन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

विदेशी नागरिकों पर पड़ेगा आर्थिक बोझ

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से नई फीस को लेकर लाया गया यह प्रस्ताव अगर लागू होता है, तो H-1B कर्मचारियों को प्रायोजित करने वाली अमेरिकी कंपनियों की लागत काफी बढ़ सकती है। इससे अमेरिका में रोजगार तलाश रहे विदेशी नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। इसका असर उन अंतरराष्ट्रीय छात्रों पर भी पड़ सकता है, जो पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए रोजगार हासिल करते हैं।

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा की शुल्क में भारी बढ़ोतरी करते हुए इसे एक लाख डॉलर कर दिया था। इससे पहले अलग-अलग परिस्थितियों में यह शुल्क करीब 2,000 से 5,000 डॉलर के बीच थी। कंपनियों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के बाद आवेदकों की संख्या में 2024 के मुकाबले 2025 में 25 फीसदी की गिरावट आई थी। इसके चलते केवल 3.44 लाख H-1B वीजा आवेदन पंजीकृत हुए।

भारतीय पेशेवरों पर पड़ेगा सबसे अधिक असर

डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी की ओर से लाए गए प्रस्ताव का असर भारतीयों पर सबसे अधिक पड़ने का अनुमान है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं के लाभार्थियों में 71 प्रतिशत भारतीय मूल के पेशेवर थे। उस वर्ष USCIS ने कुल 3,99,402 H-1B याचिकाओं को मंजूरी दी थी।

भारत के लिए इन बदलावों का महत्व इसलिए भी अधिक है, क्योंकि हालिया अनुमानों के अनुसार अमेरिका में भारतीय मूल के 52 लाख से अधिक लोग रहते हैं।

Updated on:
25 Aug 2026 09:43 am
Published on:
25 Aug 2026 09:43 am