
वोलोडिमिर जेलेंस्की और व्लादिमीर पुतिन। (Photo- ANI)
Ukraine-Russia Conflict: यूक्रेन और रूस के बीच 2022 से जारी जंग अब सिर्फ मोर्चे तक सीमित नहीं है। दोनों देश एक-दूसरे के आर्थिक और ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। इसी रणनीति के तहत यूक्रेन ने रूस की तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में मंगलवार को रूस के दक्षिणी क्रास्नोडार क्षेत्र (Krasnodar Krai) में स्थित अफिप्स्की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमले किए गए। क्षेत्रीय गवर्नर वेनियामिन कोंड्राटयेव के मुताबिक, हमले के बाद रिफाइनरी में आग लग गई और ड्रोन का मलबा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई। दो अन्य घायल हुए।
यूक्रेन के इन हमलों का सबसे बड़ा मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई और युद्ध क्षमता पर दबाव डालना है। रूस दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है। ऊर्जा से होने वाला राजस्व उसकी अर्थव्यवस्था के साथ-साथ सैन्य खर्च के लिए भी महत्वपूर्ण है। यूक्रेन की रणनीति है कि रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचाकर रूस की तेल प्रसंस्करण क्षमता को प्रभावित किया जाए और उसकी आय पर दबाव बढ़ाया जाए।
रिफाइनरी पर हमला केवल कच्चे तेल के उत्पादन को प्रभावित नहीं करता। इससे पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। हाल के हमलों के बाद रूस के कई हिस्सों में ईंधन की कमी की खबरें सामने आई हैं। मॉस्को में भी कुछ पेट्रोल पंपों पर बिक्री की सीमा लगानी पड़ी। रूस ने घरेलू आपूर्ति संभालने के लिए ईंधन निर्यात पर रोक लगाने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों का आयात भी बढ़ाया है।
यूक्रेनी हमलों का असर रूस के तेल कारोबार पर दिखाई देने लगा है। 21 अगस्त के ड्रोन हमले के बाद रूस की पर्म ऑयल रिफाइनरी ने अपना संचालन रोक दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, संयंत्र की एक प्रमुख क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट को नुकसान पहुंचा था और उसकी मरम्मत में एक से दो सप्ताह लग सकते हैं।
इससे पहले रूस की ओर्स्क रिफाइनरी भी ड्रोन हमले के बाद पूरी तरह बंद हो गई थी। इन घटनाओं से पता चलता है कि यूक्रेन अब ऐसे ठिकानों को चुन रहा है, जहां सीमित संख्या में हमले से भी तेल प्रसंस्करण और ईंधन आपूर्ति पर बड़ा असर डाला जा सके।
रिफाइनरियों के बंद होने या उनकी क्षमता घटने का असर रूस के पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर भी पड़ा है। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में रूस के समुद्री रास्ते से तेल उत्पादों के निर्यात में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 55 प्रतिशत की गिरावट आई। रिफाइनरियों पर हुए ड्रोन हमलों से उत्पादन और निर्यात दोनों प्रभावित हुए।
यूक्रेन की रणनीति का एक और पहलू रूस को अपनी महत्वपूर्ण आर्थिक और ऊर्जा संपत्तियों की सुरक्षा पर ज्यादा संसाधन खर्च करने के लिए मजबूर करना है। लगातार हमलों के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सोमवार को ऐसा आदेश जारी किया, जिसके तहत खराब सुरक्षा वाले महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर राज्य अस्थायी नियंत्रण ले सकता है। इसमें ईंधन, ऊर्जा, परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े प्रतिष्ठान भी शामिल हैं।
यानी तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के ड्रोन हमले सिर्फ आग लगाने या किसी एक संयंत्र को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे रूस की युद्ध क्षमता, ऊर्जा आय, घरेलू ईंधन आपूर्ति और निर्यात तंत्र पर एक साथ दबाव बनाने की रणनीति दिखाई देती है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठान यूक्रेन के लिए महत्वपूर्ण निशाना बने रह सकते हैं।
Updated on:
25 Aug 2026 11:40 am
Published on:
25 Aug 2026 11:40 am
