
यूरोप (Europe) में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का खतरा अब सिर्फ रिकॉर्ड तापमान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जानलेवा बनता जा रहा है। फ्रांस (France) में जून के आखिर में चली भीषण हीटवेव (Heatwave) ने महज 16 दिनों में 5,764 अतिरिक्त लोगों की जान ले ली। यह 2003 की ऐतिहासिक गर्मी के बाद देश की सबसे घातक हीटवेव है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 17 जून से 2 जुलाई के बीच देश में मौतों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में 36% ज़्यादा रही।
हीटवेव की वजह से सबसे ज़्यादा तबाही फ्रांस की राजधानी पेरिस (Paris) और उसके आसपास के इलाकों में हुई, जहाँ अकेले 1,999 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। मरने वालों में करीब दो-तिहाई बुज़ुर्ग थे, जिनकी उम्र 75 वर्ष से ज़्यादा थी। 75 वर्ष और उससे ज़्यादा आयु वर्ग में करीब 3,719 मौतें हुई, जो कुल अतिरिक्त मौतों का लगभग 65% रहा। वहीँ 15-74 आयु वर्ग में करीब 2,045 मौतें हुई, जो कुल अतिरिक्त मौतों का लगभग 35% रहा। 24 और 25 जून को फ्रांस का औसत तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि कई शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई और कई शवगृहों की क्षमता भी जवाब देने लगी।
फ्रांस ने इससे पहले 2003 में सबसे भयावह हीटवेव देखी थी, जब अगस्त में चली भीषण गर्मी से करीब 15 हज़ार अतिरिक्त लोगों की मौत हुई थी। इस त्रासदी के बाद सरकार ने 'प्लान कैनिक्यूल' (राष्ट्रीय हीटवेव योजना) लागू की, जिसके तहत हीट अलर्ट सिस्टम, बुज़ुर्गों की निगरानी, अस्पतालों की अतिरिक्त तैयारी और स्थानीय प्रशासन के लिए आपात प्रोटोकॉल बनाए गए।
वैज्ञानिकों का कहना है कि फ्रांस में भीषण हीटवेव सिर्फ असामान्य गर्मी नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है। यूरोप में इस साल आई हीटवेव से 10 हज़ार से ज़्यादा अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन पर अंकुश नहीं लगा तो ऐसी हीटवेव भविष्य में और लंबी तथा ज़्यादा घातक हो सकती है।