
Heatwave In Europe 2026: यूरोप के कई हिस्से इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं, जबकि भारत अब भी मानसून के आगे बढ़ने का इंतजार कर रहा है। फ्रांस, जर्मनी और इटली जैसे देशों में तापमान तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने लोगों को राहत देने और स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव कम करने के लिए कई कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। फ्रांस के 35 इलाकों में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। इनमें पेरिस से लेकर बरगंडी तक के इलाके शामिल हैं, जहां तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने इमरजेंसी बैठक बुलाई और कई अहम फैसलों की घोषणा की।
फ्रांस में सबसे बड़ा फैसला यह लिया गया कि फेते डे ला म्यूजिक फेस्टिवल और अन्य सार्वजनिक आयोजनों में शराब पीने पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि गर्मी के बीच शराब का सेवन स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा सकता है और इससे इमरजेंसी सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। यह प्रतिबंध फिलहाल उन्हीं क्षेत्रों में लागू किया गया है, जहां हीटवेव अलर्ट जारी है। इसके अलावा पेरिस के प्रमुख पर्यटन स्थलों, खासकर एफिल टावर और आसपास के इलाकों में 'मिस्टिंग स्टेशन' लगाए गए हैं। ये मशीनें ठंडी फुहार छोड़कर लोगों को कुछ राहत देने का काम कर रही हैं।
फ्रांस के अलावा जर्मनी के कई हिस्सों में भी हीट अलर्ट जारी किया गया है। वहीं इटली में तेज गर्मी का असर पर्यटन पर भी दिखने लगा है। रोम के प्रसिद्ध कोलोसियम में रविवार को आने वाले पर्यटकों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। जो लोग पहुंचे भी, वे तेज धूप से बचने के लिए छांव में खड़े नजर आए। इससे साफ है कि यूरोप में पड़ रही यह गर्मी केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि सामान्य जनजीवन और पर्यटन गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए यूरोपीय देशों और संस्थानों से 'हीट प्लान' लागू करने की अपील की है। संगठन ने सुझाव दिया है कि कूलिंग सेंटर खोले जाएं, काम के दौरान अतिरिक्त ब्रेक दिए जाएं और कर्मचारियों के लिए फ्लेक्सिबल शिफ्ट लागू की जाए, ताकि लोग दोपहर की तेज धूप से बच सकें। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में यूरोप में गर्मी जनित बीमारियों के कारण 2 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें बड़ी संख्या ऐसी मौतों की है, जिन्हें समय रहते सही तैयारी और सावधानी से रोका जा सकता था। यही वजह है कि यूरोप अब गर्मी को केवल मौसमी परेशानी नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के रूप में देखने लगा है।