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US Israel Iran War: होर्मुज में फंसे 20000 नाविक भूख-प्यास से बेहाल, UN ने कहा- ऐसा पहले कभी नहीं देखा

UN Warning on Hormuz Strait Crisis: होर्मुज की खाड़ी में फंसे 20,000 नाविक। भीषण बमबारी और भूख-प्यास के बीच फंसे इन नाविकों में 3,000 से 4,500 भारतीय हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा समुद्री मानवीय संकट बताया है। जानें पूरी खबर।

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Apr 02, 2026
Indian LPG tanker ship in Strait of Hormuz (File Photo - IANS)

Strait of Hormuz: ईरान और इजरायल-अमरीका युद्ध के बीच दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री लाइफलाइन, 'होर्मुज की खाड़ी' अब एक विशाल बंधक कैंप में तब्दील हो गई है। खाड़ी के भीतर 2,000 से ज्यादा जहाज फंसे हैं, जिन पर करीब 20,000 नाविक सवार हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि आधुनिक इतिहास में इतने बड़े पैमाने पर नाविकों के फंसने और उनके सामने खड़े मानवीय संकट का कोई दूसरा उदाहरण नहीं मिलता। एक अनुमान के अनुसार इसमें 20 से 30 फीसदी नाविक भारतीय हो सकते हैं।

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निकलने का रास्ता नहीं, रुकना सुरक्षित नहीं

मध्य-पूर्व में जारी भीषण बमबारी के बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर दिया है। पहले जहां रोजाना 150 जहाज गुजरते थे, अब मुश्किल से 4 या 5 ही निकल पा रहे हैं। पिछले एक महीने में 19 जहाजों पर हमले हुए हैं। इनमें 10 नाविकों की जान जा चुकी है। जहाजों पर राशन और पानी खत्म होने की कगार पर है। हालांकि सऊदी अरब और ओमान से कुछ मदद भेजी जा रही है, लेकिन युद्ध क्षेत्र में इसका वितरण बेहद कठिन है। ईरान का कहना है कि वह केवल 'गैर-शत्रु' जहाजों को ही रास्ता देगा, लेकिन 'शत्रु' की परिभाषा क्या है, इस पर सस्पेंस बरकरार है।

भारत की बढ़ रही चिंता

भारत के लिए यह खबर इसलिए चिंताजनक है क्योंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारत का बड़ा हिस्सा है। उपलब्ध डेटा और इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के रुझानों के अनुसार, इन 20,000 नाविकों में से लगभग 3,000 से 4,500 भारतीय नाविक हो सकते हैं। फिलीपींस, चीन के बाद भारत दुनिया को सबसे ज्यादा नाविक देने वाला दूसरा बड़ा देश है, जिसके वैश्विक स्तर पर 3 लाख से ज्यादा नाविक की आपूर्ति करता है।

इन भारतीय परिवारों के लिए संकट दोहरा है—एक तरफ जान का खतरा है, तो दूसरी तरफ घर की आर्थिक स्थिति। कई नाविकों ने संदेश भेजे हैं कि वे अपनी केबिन के बजाय वर्कशॉप में सो रहे हैं क्योंकि मिसाइल हमले में केबिन सबसे पहले निशाना बनते हैं।

ईरान के साथ 'सुरक्षित गलियारा' बनाए जाने को लेकर बातचीत

अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन के निदेशक डेमियन शेवेलियर ने कहा, ये नाविक एक महीने से एक्टिव वॉर जोन में काम कर रहे हैं। उनके मानसिक तनाव की कल्पना करना भी मुश्किल है। संयुक्त राष्ट्र अब ईरान के साथ बातचीत कर रहा है ताकि एक 'सुरक्षित गलियारा' बनाया जा सके और इन बेगुनाह नाविकों को बाहर निकाला जा सके।

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