
यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthis) और सऊदी अरब (Saudi Arabia) के बीच तनाव बढ़ता ही जा रहा है। दोनों पक्षों की तरफ से एक-दूसरे पर हमले तेज़ हो गए हैं। सऊदी अरब द्वारा समर्थित यमन की सरकारी सेना भी हूतियों के ठिकानों पर हमले कर रही है। पिछले दो दिन में हूतियों ने सऊदी अरब पर हमले बढ़ा दिए हैं। आज हूतियों ने पहले अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हमला किया और अब उसके पास एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया।
जानकारी के अनुसार हूतियों ने सऊदी अरब की सेना के बद्र कैंप को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं, जिसकी जानकारी हूती मिलिट्री के प्रवक्ता याह्या याह्या सरी (Yahya Saree) ने दी। हूतियों ने बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो सऊदी अरब की सेना की मिलिट्री सप्लाई पर गिरीं।
सरी ने दावा किया है कि हूतियों के हमले में सऊदी अरब की सेना को काफी नुकसान पहुंचा है और कई सैन्य अधिकारी भी हताहत हुए। हालांकि हूती मिलिट्री के प्रवक्ता ने इसका कोई सटीक आंकड़ा नहीं दिया। इसके साथ ही सरी ने सऊदी अरब को अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट का इस्तेमाल सैन्य कामकाम के लिए न करने की भी चेतावनी दी।
हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। हूती अब तक सऊदी अरब की सेना के कई ठिकानों पर हमले कर चुके हैं। इसके साथ ही अरामको (Aramco) की कई तेल रिफाइनरियों पर भी हमले किए गए हैं, जिससे तेल का उत्पादन प्रभावित हुआ है। पिछले कुछ दिनों में हूतियों ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट्स पर भी हमले शुरू कर दिए हैं। रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट, किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नजरान इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अदन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हमले किए गए हैं।
यमन में 2014 के आखिर में संघर्ष तब शुरू हुआ जब हूतियों ने सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने मार्च 2015 में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में दखल दिया। तभी से दोनों पक्षों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। हूतियों को ईरान (Iran) का समर्थन प्राप्त है तो वहीँ सऊदी अरब की तरफ से यमन की सरकारी सेना को समर्थन प्राप्त है।