
Perim Island Yemen: यमन में जारी संघर्ष अब सिर्फ जमीन पर सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा। हूती विद्रोहियों के मायून द्वीप पर कब्जे ने लाल सागर के उस समुद्री रास्ते की सुरक्षा पर नई चिंता पैदा कर दी है, जहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की बड़ी आवाजाही होती है। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में अपनी मौजूदगी मजबूत कर हूतियों ने सऊदी समर्थित सरकार पर दबाव बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करने की क्षमता हासिल कर ली है।
एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और हूती पक्ष के अधिकारी ने मायून द्वीप पर कब्जे की पुष्टि की है।
मायून, जिसे पेरिम द्वीप भी कहा जाता है, करीब 13 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला ज्वालामुखीय द्वीप है। इसकी सबसे बड़ी अहमियत इसका स्थान है। यह बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बीच स्थित है और इस समुद्री गलियारे को दो हिस्सों में बांटता है। ऐसे में यहां सैन्य मौजूदगी किसी भी पक्ष को जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर उसे प्रभावित करने का रणनीतिक लाभ देती है।
बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसके उत्तरी छोर पर स्वेज नहर है, जो यूरोप और एशिया के बीच समुद्री व्यापार का बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। इसलिए इस क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर जहाजों को वैकल्पिक और अधिक लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मायून पर नियंत्रण को हूतियों की हालिया सैन्य प्रगति की बड़ी कड़ी माना जा रहा है। समूह पहले ही यमन के बड़े हिस्से और लाल सागर के तटीय इलाकों पर प्रभाव रखता है। हनिश द्वीप पर भी उसका नियंत्रण बताया गया है। इसके अलावा मोचा बंदरगाह शहर पर हालिया कब्जे ने उसकी समुद्री स्थिति और मजबूत की है।
सुरक्षा विश्लेषक वोल्फगैंग पुस्ताई के अनुसार, यदि हूती इन इलाकों पर अपनी पकड़ कायम रखते हैं तो उनके पास बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले समुद्री यातायात को गंभीर रूप से प्रभावित करने की वास्तविक क्षमता हो सकती है। यह स्थिति ईरान के लिए भी रणनीतिक लाभ पैदा कर सकती है, क्योंकि तेहरान और अमेरिका के बीच क्षेत्रीय तनाव पहले से चरम पर है।
हूतियों ने कहा है कि सामान्य वाणिज्यिक जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाएगा और उनकी कार्रवाई मुख्य रूप से सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ होगी। लेकिन अतीत का रिकॉर्ड इस आश्वासन को पूरी तरह निश्चिंत करने वाला नहीं है। नवंबर 2023 से 2025 के मध्य तक लाल सागर में 100 से अधिक वाणिज्यिक जहाज हूती हमलों की चपेट में आए थे।
यदि हमले फिर व्यापक होते हैं तो बीमा प्रीमियम, जहाजों के किराये और माल ढुलाई लागत में तेजी आ सकती है। इसका असर तेल के अलावा कंटेनर परिवहन और रोजमर्रा की आयातित वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
मायून पर नियंत्रण बनाए रखना आसान नहीं होगा। यमन की सरकार के लिए द्वीप को वापस लेने का विकल्प मौजूद है, लेकिन इसके लिए समुद्री या सैन्य अभियान की जरूरत पड़ सकती है, जो जोखिम भरा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि हूतियों की असली ताकत द्वीप से ज्यादा उसके आसपास के मुख्य भूभाग और तटीय क्षेत्रों पर नियंत्रण में है।
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि हूतियों ने अमेरिका से संपर्क कर संघर्ष में हस्तक्षेप नहीं करने का आग्रह किया है। दूसरी ओर, इराक ने ईरान से लगने वाली अपनी तीन सीमा चौकियां अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं, जबकि सऊदी अरब ने अपने ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को ड्रोन हमले के बाद एहतियातन रोक दिया है।
ऐसे में मायून द्वीप की लड़ाई अब केवल यमन का स्थानीय सैन्य घटनाक्रम नहीं रह गई है। यह लाल सागर की सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और खाड़ी क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति के लिए आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है