
IAEA on Iran Nuclear Program: अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते तथा परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी बयानबाजी के बीच अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रोसी ने साफ कहा है कि केवल दावों और इरादों के आधार पर किसी देश के परमाणु कार्यक्रम पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए एक बेहद मजबूत सत्यापन प्रणाली जरूरी है और एजेंसी को हर परमाणु ठिकाने तक पूरी पहुंच मिलनी चाहिए।
शुक्रवार को टोक्यो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ग्रोसी ने कहा कि ईरानी सरकार बार-बार कहती रही है कि उसका परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है लेकिन सिर्फ ऐसा दावा कर देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, "इरादे काफी नहीं हैं। पूरी तरह आश्वस्त होने के लिए हमें जल्द से जल्द एक मजबूत सत्यापन प्रणाली चाहिए। हमें हर जगह जांच करनी होगी।"
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी प्रमुख का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान सीजफायर को स्थायी शांति समझौते में बदलने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इसी दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु ठिकानों के निरीक्षण को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
अमेरिका का कहना है कि हालिया समझौते और उसके बाद हुई बातचीत में ईरान ने व्यापक परमाणु निरीक्षण के लिए सहमति दे दी है। वहीं, ईरान का दावा है कि इस मुद्दे पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है और यह केवल व्यापक समझौते का हिस्सा होगा।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन परमाणु ठिकानों का निरीक्षण है जिन पर पिछले साल अमेरिका और इजरायल ने 12 दिन तक चले युद्ध के दौरान हमले किए थे।
हमलों के बाद ईरान ने कुछ समय के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के साथ सहयोग रोक दिया था। बाद में सितंबर में उसने निरीक्षकों को दोबारा आने की अनुमति दी लेकिन जिन परमाणु स्थलों पर बमबारी हुई थी वहां अब तक एजेंसी को पूरी पहुंच नहीं मिली है। इसके अलावा ईरान के समृद्ध यूरेनियम का पूरा हिसाब भी अभी सामने नहीं आया है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी प्रमुख ने अमेरिका और ईरान के विरोधाभासी बयानों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस समय दोनों देशों के बीच 'बयानों की जंग' चल रही है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रारंभिक समझौते में यह साफ लिखा गया है कि परमाणु कार्यक्रम से जुड़े हिस्से की निगरानी IAEA ही करेगा।
ग्रोसी ने कहा कि एजेंसी का तकनीकी काम शुरू हो चुका है और उम्मीद है कि निरीक्षण दल जल्द ही संबंधित परमाणु स्थलों तक पहुंच सकेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इसमें एक-दो सप्ताह का अंतर पड़ने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि समझौते में परमाणु मुद्दे के अलावा कई अन्य पहलू भी शामिल हैं।
उधर, ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बार फिर अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया है। मंत्रालय ने अमेरिका और इजरायल पर आरोप लगाया कि वे ईरान के खिलाफ झूठे आरोप लगाकर माहौल बना रहे हैं।
ईरान ने साथ ही खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों से पश्चिम एशिया को परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र बनाने के लिए सहयोग की भी अपील की है। वहीं अमेरिका लगातार यह कहता रहा है कि ईरान को सर्वोच्च स्तर के परमाणु निरीक्षण स्वीकार करने होंगे ताकि भविष्य में उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर किसी तरह का संदेह न रहे।