Indian National Arrested In US: अमेरिका में एक भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया गया है। क्या है पूरा मामला? आइए जानते हैं।
अमेरिका (United States of America) के इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट - आईसीई (Immigration and Customs Enforcement - ICE) ने 21 मई को लॉस एंजेलिस (Los Angeles) में 26 वर्षीय भारतीय नागरिक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम परमिंदरपाल सिंह (Parminderpal Singh) है, जिसे आईसीई की लॉस एंजेलिस यूनिट ने गिरफ्तार किया और सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी भी दी।
परमिंदरपाल के खिलाफ पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज थे। आईसीई अधिकारियों के अनुसार परमिंदरपाल पर व्हीकल की चोरी, बड़ी चोरी, अनाधिकृत प्रवेश और तोड़फोड़ के आरोप थे। इसी वजह से उसे गिरफ्तार किया गया। उसके आपराधिक रिकॉर्ड पर बात करते हुए आईसीई अधिकारियो का कहना है कि यह 'क्रिमिनल नॉन-सिटिज़न” की गिरफ्तारी है और अमेरिका में अवैध प्रवासियों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई का हिस्सा है।
परमिंदरपाल फिलहाल लॉस एंजेलिस में आईसीई की गिरफतारी में है और उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उससे पूछ्ताछ की जा रही है और आईसीई द्वारा उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया चल रही है। इमिग्रेशन कोर्ट में सुनवाई के बाद उसका डिपोर्टेशन तय होगा।
आईसीई अमेरिका की संघीय एजेंसी है, जो डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (Department of Homeland Security - DHS) के अधीन काम करती है। यह एजेंसी मुख्य रूप से अमेरिका में इमिग्रेशन और कस्टम्स कानूनों को लागू करने की ज़िम्मेदारी संभालती है। इसके लिए आईसीई के एजेंट्स अवैध प्रवासियों, वीज़ा ओवरस्टेयर्स और आपराधिक रिकॉर्ड वाले विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर डिपोर्ट करते हैं। आईसीई के अधिकारी कहते हैं कि उनकी प्राथमिकता 'वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट' यानी सबसे खतरनाक आपराधिक अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार करना है। इसके लिए आईसीई एजेंट्स वर्कप्लेस, घरों और सार्वजनिक स्थानों पर छापेमारी भी करते हैं। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ही यह एजेंसी विवादों में घिरी हुई है। कई लोग इसे क्रूर और मनमानी कार्रवाई करने वाली एजेंसी मानते हैं। आलोचकों का आरोप है कि यह एजेंसी परिवारों को अलग करती है, बच्चों को हिरासत में रखती है और निर्दोष प्रवासियों को भी निशाना बनाती है। ट्रंप प्रशासन के दौरान बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों और डिपोर्टेशनों के कारण इसकी आलोचना बढ़ गई है। प्रवासी अधिकार संगठन इसे 'डर का माहौल' बनाने वाला बताते हैं।