लगभग 6 दिन पहले इमरान खान ने IMF से कहा था कि वो पाकिस्तान को कर्ज देने से पहले ऑडिट कराएं, अब फिर से इमरान खान ने IMF को चिट्ठी लिखी है, कर्ज देने से पहले 30 प्रतिशत राष्ट्रीय और प्रांतीय असेंबली सीटों का ऑडिट सुनिश्चित करने की बात कही है।
पाकिस्तान (Pakistan) में इन दिनों कुछ भी चल रहा है। एक तरफ सत्ता के लिए सियासतदानों की सियासी लड़ाई नहीं थम रही तो दूसरी तरफ अभी तक नया प्रधानमंत्री (Prime Minister Of Pakistan) इस मुल्क को नहीं मिल रहा। वहीं कंगाली में गुज़र-बसर कर रहा पाकिस्तान कर्ज के लिए इधर-उधर हाथ फैला रहा है। लेकिन पाकिस्तान के कुछ प्रमुख नेता शायद ये चाहते ही नहीं कि पाकिस्तान को कर्ज मिले, पैसा मिले। दरअसल इन दिनों जेल में बंद पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI के प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) IMF (अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष) को लगातार चिट्ठी लिख रहे हैं और पाकिस्तान को कर्ज देने से पहले ऑडिट करवाने की बात कह रहे हैं।
कर्ज देने से पहले करा लें सीटों का ऑडिट
इमरान खान (Imran Khan) ने IMF को जेल में बैठे हुए एक लेटर लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान से बेलआउट बातचीत करने से पहले कम से कम 30% नेशनल और रिजनल (प्रांतीय) असेंबली की सीटों का ऑडिट करा लें। क्योंकि इस चुनाव में जमकर धांधली हुई है। बता दें कि लगभग हफ्ते भर पहले ही इमरान खान ने ये कहा था कि IMF पाकिस्तान को कर्ज देने की सोच रहा है तो मैं कहूंगा कि इससे थोड़ा सा बचें, क्योंकि चुनाव में धांधली हुई है और ये सब मुझे और मेरी पार्टी को सत्ता से बाहर रखने के लिए किया गया है।
पाकिस्तान पर कितना कर्ज
अगर हम ये कहें कि पाकिस्तान पर कितना कर्ज हैं तो बता हैं कि पाकिस्तान पर कर्ज नहीं है, वो तो कर्ज के ढेर के अंदर है। पिछले दिनों पाकिस्तान के ही एक थिंग टैंक की आई रिपोर्ट ने ये बताया था कि पिछले 12 सालों में पाकिस्तान ने विदेश से जो कर्ज लिया है, वो 12 गुना तक बढ़ गया है। इस समय पाकिस्तान पर कुल 103.38 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है।
बता दें कि पिछले साल के जून महीने में IMF और पाकिस्तान में कर्ज को लेकर सहमति बन गई थी, जिसके बाद IMF ने पाकिस्तान को कर्ज देने का फैसला लिया था। IMF ने अपनी स्टैंडबाय फैसिलिटी के जरिए पाकिस्तान को 3 बिलियन डॉलर कर्ज देने का ऐलान किया है।
क्या होता है स्टैंडबाय फैसिलिटी
IMF जिस स्टैंडबाय क्रेडिट सुविधा के जरिए पाकिस्तान को कर्ज देने की बात रहा है, उसका मतलब है कि वो कम आय वाले देशों को कम समय के लिए (अल्पकालिक) भुगतान संतुलन की जरूरतों के साथ वित्तीय सहायता देगा। ये IMF की गरीबी को कम करने वाले और विकास ट्रस्ट की सुविधाओं में से एक है।