
अमेरिकी प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (फोटो: IANS)
Geopolitical Tension: मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के अंतिम दिनों में कड़वाहट इतनी बढ़ गई है कि शांति की उम्मीदें अब धुंधली होती जा रही हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को फारस की खाड़ी में फंसे सैकड़ों व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करना पड़ रहा है। दोनों ही देश एक-दूसरे पर समझौते तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं और नई जंग के लिए अपनी सेनाओं को मुस्तैद कर रहे हैं।
इस पूरे विवाद की मुख्य जड़ 'होर्मुज जलडमरूमध्य' है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के व्यापार की जीवन रेखा है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। युद्ध के दौरान ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे पूरी दुनिया में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं और महंगाई का डर सताने लगा। हालांकि, कुछ समय के लिए इसे खोला गया था, लेकिन अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को पकड़ने और कड़ी नाकेबंदी करने के बाद हालात फिर बिगड़ गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक कोई ठोस और लिखित समझौता नहीं होता, ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव जारी रहेगा। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि युद्धविराम की समयसीमा अब और नहीं बढ़ाई जाएगी। अगर ईरान अमेरिकी शर्तों को नहीं मानता है, तो उस पर फिर से सैन्य कार्रवाई हो सकती है।
दूसरी ओर, ईरान किसी भी तरह के दबाव में झुकने को तैयार नहीं है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची और राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का स्पष्ट कहना है कि अमेरिका बातचीत के नाम पर सिर्फ आत्मसमर्पण चाहता है। उनका तर्क है कि व्हाइट हाउस की आक्रामक बयानबाजी और भड़काऊ कदम शांति प्रक्रिया को तबाह कर रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके पास युद्ध के मैदान में अभी भी कई नए विकल्प मौजूद हैं।
अब पूरी दुनिया की नजरें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिक गई हैं। अमेरिका इस संकट को सुलझाने के लिए अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को बातचीत के लिए भेज रहा है। हालांकि, इस बात पर संशय बरकरार है कि ईरान इस बैठक में शामिल होगा या नहीं।
वैश्विक शेयर और ऊर्जा बाजार में इस खबर के बाद भारी दहशत देखी जा रही है। दुनिया भर के निवेशकों को डर है कि अगर युद्ध फिर भड़का, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ सकती है। संयुक्त राष्ट्र की रेस्क्यू टीम फारस की खाड़ी में फंसे इन जहाजों को किन सुरक्षित रास्तों से बाहर निकालेगी और क्या इस दौरान कोई सैन्य टकराव होगा, इस पर आगे के अपडेट का इंतजार है।
पाकिस्तान के लिए यह कूटनीतिक बैठक एक बड़ी चुनौती है। इतनी हाई-प्रोफाइल बैठक के लिए इस्लामाबाद में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है, लेकिन थोड़ी सी भी चूक पूरे दक्षिण एशिया की शांति को खतरे में डाल सकती है।
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Updated on:
21 Apr 2026 04:17 pm
Published on:
21 Apr 2026 04:15 pm
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