
Donald Trump (Photo - White House)
US-Iran: अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वार्ता होनी है। इस बातचीत से एक दिन पहले ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने लेबनान में युद्धविराम और वार्ता शुरू होने से पहले ईरान की जब्त की गई संपत्तियों की रिहाई की मांग की थी। ऐसे में दोनों देशों के बीच वार्ता पटरी से उतरने की आशंका व्यक्त की जाने लगी थी।
हालांकि 'रॉयटर्स' ने एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र के हवाले से आज खबर दी थी कि अमेरिका कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा की गई की ईरानी संपत्तियों को जारी करने पर सहमति दे दी है। हालांकि कुछ घंटों के बाद व्हाइट हाउस की तरफ से इसको लेकर स्पष्टीकरण आया। व्हाइट हाउस ने ईरानी सूत्रों के हवाले से चल रही इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।
अमेरिका ने 8 साल पहले विदेशों में जमा ईरान की 8 बिलियन डॉलर राशि फ्रीज कर दी थी। अमेरिका और ईरानी कैदियों की अदला-बदली के एक हिस्से के रूप में 2023 में फंड के रिलीज होने की उम्मीद जगी थी। हालांकि ईरान के सहयोगी फिलीस्तीनी आतंकी समूह हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमला कर दिया था। इसके बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने ईरान की संपत्ति को फ्रीज कर दिया था। अमेरिकी अधिकारियों ने उस वक्त कहा था कि ईरान भविष्य में इस धन का उपयोग नहीं कर पाएगा। वाशिंगटन ने धनराशि को फ्रीज करने का अधिकार दे रखा है।
अमेरिका के साथ इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता को लेकर ईरान की तरफ से बेहद अहम बयान आया है। ईरान की तरफ से स्पष्ट किया है कि यदि इस्लामबाद में होनी वाली बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है तो इसमें सिर्फ इजरायल को दोष नहीं दिया जा सकता है। ईरान ने मौजूदा स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि कुछ लोग यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि इजरायल और अमेरिका के फैसले आपस में जुड़े हुए हैं। इस्लामाबाद में दोनों देशों कीच यह बातचीत फेल होती है तो उसकी जिम्मेदारी अमेरिका की भी होगी।
Published on:
11 Apr 2026 06:13 pm
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