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US-Iran वार्ता पर संकटः ईरानी सांसद मोहम्मद रज़ा मोहसेनी सानी बोले, ‘मौजूदा हालात में अमेरिका के साथ बातचीत नहीं’

US-Iran negotiations: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर पाकिस्तान में तैयारियों के बीच ईरानी सांसद मोहम्मद रज़ा मोहसेनी सानी ने बातचीत को अस्वीकार्य बताया। ईरान ने पाकिस्तान में किसी भी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी से भी इनकार किया और अमेरिका-इजरायल पर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने के आरोप लगाए।
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भारत

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Satya Brat Tripathi

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Updated: 21 Apr 2026, 3:41 PM IST

Second Round of US-Iran Talks

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (फोटो- AI)

US-Iran Peace Talks: अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता को लेकर पाकिस्तान में तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच यह बातचीत खटाई में पड़ती दिख रही है। दरअसल, इसको लेकर ईरानी सांसद मोहम्मद रज़ा मोहसेनी सानी (Mohammad Reza Mohseni Sani) ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि मौजूदा हालात में अमेरिका से बातचीत स्वीकार्य नहीं है। ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सानी ने अमेरिका के साथ वार्ता की संभावनाओं पर भी संदेह जताया है।

ईरान की मेहर समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा, 'मौजूदा परिस्थितियों में बातचीत स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने अमेरिका पर अत्यधिक मांगें रखने और घरेलू फायदे के लिए छिपे हुए उद्देश्यों का आरोप लगाया। उन्होंने आगे कहा, 'वर्तमान हालात, हाल की आक्रामक कार्रवाइयों और अमेरिका के साथ पिछले वार्ताओं के अनुभव को देखते हुए, अगला दौर की बातचीत, ईश्वर की इच्छा से, अब नहीं होगा।'

'ईरानी प्रतिनिधिमंडल नहीं गया इस्लामाबाद'

ईरान के सरकारी प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIN) ने भी कहा है कि कोई भी ईरानी राजनयिक प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद नहीं गया है। इस तरह की चल रही खबरों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया है। बयान में कहा गया है, ईरान का कोई भी राजनयिक प्रतिनिधिमंडल अभी तक पाकिस्तान के इस्लामाबाद की यात्रा पर नहीं गया है।

धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों पर हमले की निंदा

ईरान की मानवाधिकार उच्च परिषद ने अमेरिका और इजरायल द्वारा देश भर में धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है। सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, परिषद ने कहा कि ये हमले ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रतीकों को जानबूझकर नष्ट करने की कोशिश को दर्शाते हैं।

बयान में कहा गया कि तेहरान के यहूदी सिनेगॉग (प्रार्थना स्थल) को निशाना बनाना, साथ ही निकोलस ऑर्थोडॉक्स कैथेड्रल और सेंट मैरी ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च को भारी नुकसान पहुंचाना, केवल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन ही नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला भी है।

परिषद ने कहा, 'ये हमले न केवल हमलावर देशों द्वारा मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय मानकों की पूरी अनदेखी को दर्शाते हैं, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण हैं कि वे ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की पहचान को मिटाने की मंशा रखते हैं।'

बयान में यह भी कहा गया कि ईरान में धार्मिक अल्पसंख्यकों को हमेशा कानून और आपसी सम्मान के दायरे में धार्मिक अधिकार मिलते रहे हैं।