"भारत-बांग्लादेश के बीच जारी तनाव के बीच चीनी राजदूत ने रणनीतिक रूप से संवेदनशील तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा किया। सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के करीब चीन की इस सक्रियता और यूनुस सरकार के रुख ने भारत की कूटनीतिक चिंताएं बढ़ा दी हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।"
भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में चल रहे तनाव के बीच एकबार फिर चीन की एंट्री हुई है। सोमवार को बांग्लादेश में चीनी राजदूत याओ वेन ने तीस्ता नदी परियोजना क्षेत्र का दौरा किया। यह भारत के रणनीतिक सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद करीब है। इसे ही ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कहा कि यह दौरा पूरी तरह तकनीकी आकलन से जुड़ा है। यूनुस इससे पहले चीन में पूर्वोत्तर पर विवादित बयान भी दे चुके हैं जिसका भारत विरोध करता रहा है।
चीनी राजदूत के साथ बांग्लादेश की जल संसाधन सलाहकार सैयदा रिजवाना हसन भी मौजूद थीं। हसन ने कहा कि चीन तीस्ता मास्टर प्लान को जल्द से जल्द लागू करने के लिए उत्सुक है। दोनों देश इस प्रोजेक्ट के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि चूंकि प्रोजेक्ट की जांच प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए फिलहाल काम शुरू करना संभव नहीं है। तीस्ता नदी बांग्लादेश के उत्तरी जिलों के लिए अहम है। वहीं भारत के पश्चिम बंगाल के लिहाज से भी इसकी अहमियत है। तीस्ता जल बंटवारे को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच दशकों से बातचीत चल रही है।
चीनी राजदूत याओ वेन ने रविवार को बांग्लादेश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार खलीलुर रहमान के साथ भी बैठक की थी। कहा गया कि दोनों पक्षों ने आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बात की। लंबे समय से चली आ रही दोस्ती की पुष्टि की। इस चर्चा में तीस्ता नदी परियोजना और प्रस्तावित बांग्लादेश–चीन फ्रेंडशिप हॉस्पिटल भी शामिल रहे। बताया गया कि चीनी राजदूत ने तीस्ता परियोजना क्षेत्र का दौरा करने की जानकारी पहले ही दी थी।