
खामेनेई और उनके बेटे मुजतबा (फोटो- Ryan Rozbiani एक्स पोस्ट)
US-Israel-Iran War: ईरान की सत्ता में पिछले कुछ ही दिनों में बड़े बदलाव देखने को मिले। इजरायल और अमेरिका के अचानक ईरान पर हमला कर देने से मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू हो गया जिसके रुकने के फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस युद्ध में ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई को खो दिया जिसके बाद देश की कमान उनके बेटे मोजतबा खामेनेई के हाथों में आ गई। मोजतबा को नए आयतुल्लाह बनाए जाने के बाद ईरान पर संकट और अधिक बढ़ गया क्योंकि ट्रंप यह पहले ही साफ कर चुके थे कि नए सुप्रीम लीडर का चयन उनकी राय के बिना नहीं होगा। इसके बावजूद मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया। लेकिन क्या आप जानते है कि ट्रंप के साथ साथ मोजतबा के पिता अली खामेनेई भी नहीं चाहते थे कि वह उनके उत्तराधिकारी बने।
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की 28 फरवरी को अमेरिका और इजायरल के हमलों में मौत हो गई थी। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट्स के अनुसार, अली खामेनेई ने अपनी वसीयत में यह साफ लिखा था कि उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का अगला सुप्रीम लीडर न बनाया जाए। लेकिन खामेनेई की इच्छा के खिलाफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के दबाव में मोजतबा को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खामेनेई को अपने बेटे की राजनीतिक क्षमता और अनुभव को लेकर गंभीर संदेह था और इसलिए उन्होंने उन्हें उत्तराधिकारी बनाने का समर्थन नहीं किया था।
ईरानी खुफिया नेटवर्क से जुड़े होने का दावा करने वाले विपक्षी संगठन नेशनल यूनियन फॉर डेमोक्रेसी में रिसर्च डायरेक्टर खुसरो इस्फहानी ने कहा कि खामेनेई ने अपनी वसीयत में लिखा था कि उनके बेटे मोजतबा को उनका उत्तराधिकारी न बनाए। इस्फहानी ने आगे कहा कि, अली खामेनेई का मानना था कि मोजतबा के पास देश चलाने के लिए जरूरी अनुभव और राजनीतिक कद नहीं है। इस्फहानी ने यह भी कहा कि, मोजतबा एक प्रभावहीन युवा मौलवी है, जिसने अपने राजनीतिक जीवन में कुछ भी हासिल नहीं किया है। इतने सालों में अपने पिता के नाम के अलावा उनकी अपनी कोई पहचान या उपलब्धि नहीं है।
बता दें कि, ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन आमतौर पर असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स नामक धार्मिक परिषद करती है। लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि इस बार प्रक्रिया सामान्य नहीं रही। कुछ रिपोर्टों के अनुसार इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने परिषद पर भारी दबाव डाला और आखिरकार मोजतबा खामेनेई को नया आयतुल्लाह घोषित कर दिया गया। कहा जा रहा है कि कई धार्मिक नेताओं ने इस फैसले का विरोध भी किया और कुछ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार तक कर दिया। इस्फहानी ने अंदरूनी सूत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि मोजतबा को धार्मिक परिषद के बहुमत वोट तक भी नहीं मिले थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें नया आयतुल्लाह बना दिया गया।
Updated on:
11 Mar 2026 11:59 am
Published on:
11 Mar 2026 11:50 am
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