
India Remittance: भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस (विदेशों से भेजी जाने वाली रकम) पाने वाला देश तो पहले से ही है, लेकिन अब सामने आए आंकड़ों ने इसकी बढ़ती रफ्तार का चौंकाने वाला खुलासा किया है। UN की एजेंसी 'इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट' (IFAD) के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत को मिलने वाली रकम ढाई गुना से ज्यादा बढ़ गई है।
IFAD की रिपोर्ट बताती है कि विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा निजी तौर पर घर भेजी गई रकम 2016 में 63 अरब डॉलर थी, जो पिछले साल बढ़कर 151 अरब डॉलर तक पहुंच गई। गौर करने वाली बात यह है कि इन आंकड़ों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) या कोई अन्य संस्थागत ट्रांसफर शामिल नहीं है, यह सिर्फ लोगों की अपनी कमाई से परिवार तक पहुंचाई गई रकम है।
सिर्फ भारत ही नहीं, वैश्विक स्तर पर भी रेमिटेंस में जबरदस्त उछाल आया है। IFAD के मुताबिक दुनिया भर में रेमिटेंस पिछले साल 728.6 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जो 2016 के मुकाबले लगभग दोगुनी है। रिपोर्ट के अनुसार यह रकम परिवारों को जरूरी खर्च पूरे करने, संकट के समय टिके रहने और आर्थिक मजबूती बनाने में बड़ी मदद करती है।
रिपोर्ट में खास तौर पर भारत के डिजिटल ढांचे की तारीफ की गई है। IFAD के मुताबिक आधार डिजिटल पहचान प्रणाली और यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने पैसा पाने वालों तक इसे आसानी से पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह मजबूत घरेलू डिजिटल आधार की अहमियत को साफ तौर पर दिखाता है। IFAD के प्रेसिडेंट अल्वारो लारियो ने कहा कि रेमिटेंस जब सस्ती और भरोसेमंद वित्तीय सेवाओं से जुड़ती है, तभी परिवारों को इसका सबसे ज्यादा फायदा मिल पाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देश भारत सहित दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए रेमिटेंस का एक बड़ा जरिया बने हुए हैं, जिससे लाखों परिवारों को सहारा मिलता है। हालांकि IFAD ने चेताया कि यह निर्भरता जोखिम भी लेकर आती है, भर्ती, आर्थिक गतिविधि या ट्रांसपोर्ट में किसी भी रुकावट का सीधा असर मजदूरों और उनके परिवारों पर पड़ सकता है। फिर भी हालिया झटकों के बावजूद देश में रेमिटेंस की आवक स्थिर बनी हुई है।