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क्या है डेटा एंबेसी? भारत और यूएई खोलेंगे पहला अंतरराष्ट्रीय डिजिटल दूतावास

भारत-यूएई की साझेदारी में खुलेगी देश की पहली डेटा एंबेसी। जानें कैसे दूसरे देश में रखे भारतीय सर्वर्स को मिलेगी राजनयिक छूट और क्यों यह तकनीक भविष्य की सुरक्षा के लिए है सबसे जरूरी

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Jan 21, 2026
PM Modi and UAE president Sheikh Mohamed bin Zayed (Photo/X@narendramodi)

India's first data embassy: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच डेटा एंबेसी (डिजिटल दूतावास) बनाने पर सहमति बनी है। अगर यह योजना अमल में आती है तो यह भारत के लिए पहली बार होगा जब वह किसी अन्य देश में अपनी डिजिटल एंबेसी खोलेगा। क्या है डेटा एंबेसी, आइए जानते हैं:

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डेटा एंबेसी में आखिर होगा क्या?

जिस तरह कोई देश दूसरे देश में अपना दूतावास खोलता है, उसी तरह डेटा एंबेसी में वह देश अपना जरूरी डिजिटल डेटा (जैसे सरकारी रिकॉर्ड, वित्तीय जानकारी, नागरिकों से जुड़ा अहम डेटा) सुरक्षित रखता है, लेकिन यह डेटा किसी दूसरे देश में रखा जाता है। इसका मकसद साइबर हमलों, आपदाओं या भू-राजनीतिक संकटों की स्थिति में डिजिटल डेटा पर संप्रभुता सुनिश्चित करना होता है। इस एंबेसी में सरकारी कंप्यूटर सर्वर होते हैं।

क्या डेटा तक दूसरे देश की पहुंच होगी?

इसकी कार्यप्रणाली पारंपरिक दूतावास जैसी ही होती है। डेटा एंबेसी में रखा गया डेटा पूरी तरह उस देश के नियंत्रण और अधिकार क्षेत्र में रहता है, जिसने उसे स्थापित किया है। मेजबान देश के कानून उस डेटा पर लागू नहीं होते और उसे तलाशी, जब्ती या किसी कानूनी कार्रवाई से छूट प्राप्त होती है। भारत-यूएई के बीच ऐसा समझौता गहरे भरोसे को दर्शाता है।

दुनिया में ऐसी कितनी एंबेसी हैं?

भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि इसमें वही डेटा शामिल किया जाएगा, जिसे देश राष्ट्रीय और रणनीतिक दृष्टि से अहम मानता है। 2017 में एस्टोनिया दुनिया का पहला देश बना, जिसने लक्जमबर्ग में डेटा एंबेसी स्थापित की। 2021 में मोनाको ने भी वहां अपनी ई-एंबेसी बनाई। भारत के लिए यह अवधारणा नई है।

क्या है भारत का प्लान?

भारत ने 2023-24 के बजट में देश के भीतर डेटा एंबेसी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था, ताकि दूसरे देशों के लिए डिजिटल ट्रांसफर को आसान बनाया जा सके। आईटी मंत्रालय इस पर नीति तैयार कर रहा है, जिसके तहत अन्य देशों और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को भारत में डेटा एंबेसी बनाने की अनुमति दी जा सकती है। इन्हें भारतीय कानूनों के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

Updated on:
21 Jan 2026 04:47 am
Published on:
21 Jan 2026 04:40 am
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