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आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस, भारत ने दुनिया के सामने रखा अपना एजेंडा, उठाए अहम मुद्दे

India at UN Counter Terrorism: संयुक्त राष्ट्र यानी कि यूएन में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। साथ ही विकासशील देशों के लिए सस्ते क्लाइमेट फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और भरोसेमंद मदद की मांग उठाई।
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Sep 24, 2026
UN INDIA STAND
UN में भारत की दोटूक बात: आतंकवाद पर भारत ने रखना अपना पक्ष। (सोर्स- X /@Randhir Jaiswal)

India Foreign Policy Latest Update: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन को लेकर मुदा उठाया। विदेश मंत्रालय के सचिव सुधाकर दलेला ने कई अहम बैठकों में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख दोहराया। साथ ही विकासशील देशों के लिए आसान और भरोसेमंद क्लाइमेट फाइनेंस की मांग की।

आतंकवाद के पीड़ितों को एजेंडे के केंद्र में रखने पर जोर

दलेला ने ‘ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स ऑफ विक्टिम्स ऑफ टेररिज्म’ की 7वीं मिनिस्टीरियल मीटिंग में हिस्सा लिया। यहां उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति दोहराई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद से प्रभावित लोगों की आवाज को वैश्विक काउंटर-टेररिज्म एजेंडे में अहम जगह मिलनी चाहिए। भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।

दलेला ने आतंकवाद के पीड़ितों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म प्रयासों को और मजबूत करने की बात कही।

क्लाइमेट अडैप्टेशन के लिए भरोसेमंद फंडिंग की मांग

UN में क्लाइमेट एक्शन और जस्ट ट्रांजिशन पर भी चर्चा हुई। दलेला ने क्लाइमेट अडैप्टेशन की फाइनेंसिंग पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने भारत के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम का जिक्र किया। ऐसे सिस्टम बाढ़, चक्रवात और दूसरी आपदाओं से पहले लोगों को अलर्ट करने में मदद करते हैं। दलेला ने कहा कि क्लाइमेट अडैप्टेशन को देश और राज्य स्तर की योजनाओं का हिस्सा बनाना जरूरी है। इसके लिए विकासशील देशों को लगातार और अनुमानित फंडिंग चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्लाइमेट फाइनेंस से कमजोर देशों पर कर्ज का बोझ नहीं बढ़ना चाहिए।

सस्ता क्लाइमेट फाइनेंस और टेक्नोलॉजी भी जरूरी

क्लाइमेट फाइनेंस पर एक अलग बैठक में भारत ने अपनी प्रगति के बारे में बताया। दलेला ने बताया कि भारत की इंस्टॉल्ड बिजली क्षमता में नॉन-फॉसिल स्रोतों की हिस्सेदारी 54 फीसदी से ज्यादा हो चुकी है। भारत ने विकासशील देशों के लिए सस्ते क्लाइमेट फाइनेंस की जरूरत बताई। इसके साथ ही आधुनिक और जरूरी टेक्नोलॉजी तक आसान पहुंच की मांग की गई।

भारत का कहना है कि क्लाइमेट फाइनेंस की नई प्रतिबद्धताएं विकास सहायता का विकल्प नहीं बननी चाहिए। ये फंड अतिरिक्त होने चाहिए। ऐसे में इन बैठकों में भारत ने आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर अपना रुख सामने रखा। एक तरफ आतंकवाद के पीड़ितों के लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बात हुई। दूसरी तरफ क्लाइमेट रिस्क से जूझ रहे देशों के लिए टिकाऊ और भरोसेमंद वित्तीय मदद की जरूरत बताई गई।

Updated on:
24 Sept 2026 12:12 pm
Published on:
24 Sept 2026 12:12 pm