
India Indonesia Partnership: विश्व के 10 देशों में प्रचलन के बाद अब भारत के यूपीआई पेमेंट सिस्टम से जुड़ने वाला इंडोनेशिया 11वां देश बनने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ऐलान किया कि भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम से जुड़ेगा। इससे भारतीय यात्रियों के लिए स्थानीय पेमेंट ऐप का इस्तेमाल करके इंडोनेशिया में भुगतान करना आसान हो जाएगा।
जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "हमें खुशी है कि भारत का यूपीआई इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ जुड़ने जा रहा है। इससे कारोबार करने और यात्रा करने, दोनों में आसानी होगी।
भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) सिस्टम अभी सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और ग्रीस में सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इंडोनेशिया यूपीआई से जुड़ने वाला 11वां देश बनेगा। इन देशों में भारतीय यात्री बिना नकदी के झंझट के अपने यूपीआई ऐप (जैसे PhonePe, BHIM, Google Pay) के जरिए सीधे क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान कर सकते हैं।
मंगलवार को हुए लगभग एक दर्जन समझौतों में भारत और इंडोनेशिया ने समुद्री सुरक्षा और सहयोग के लिए एक फ्रेमवर्क को भी अंतिम रूप दिया। पीएम मोदी ने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (आईएसआरओ) शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए बाहरी अंतरिक्ष की खोज और इंडोनेशिया के अंतरिक्ष क्षेत्र की क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा।
पीएम मोदी ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर (आईआईएमबी) इंडोनेशिया में अपना कैंपस स्थापित करेगा। इस कैंपस से पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को बहुत लाभ होगा। प्रस्तावित कैंपस इंडोनेशिया के मलंग में सिंघासारी स्पेशल इकोनॉमिक जोन (एसईजेड) में स्थापित किया जाएगा और यह भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम के अंतरराष्ट्रीय की दिशा में एक अहम कदम है।
पीएम मोदी ने कहा, कल, मुझे राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करने का सौभाग्य मिलेगा। एक हजार साल से भी ज्यादा पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की इंडोनेशिया की ऐतिहासिक यात्रा की शताब्दी को 'सांस्कृतिक और शैक्षिक कूटनीति के टैगोर-देवान्तारा वर्ष' के रूप में मनाएंगे।