BRICS India 2026: ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के लिए भारत में दो दिवसीय शिखर सम्मेलन चल रहा है। इसी दौरान आज भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की।
भारत (India) में ब्रिक्स (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों के लिए दो दिवसीय सम्मेलन चल रहा है। 14 और 15 मई को आयोजित इस सम्मेलन पर दुनियाभर की नज़रें हैं। दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में आज भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर (S. Jaishankar) ने ईरान (Iran) के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) से मुलाकात की। ईरान के खिलाफ युद्ध के बाद यह अराघची का यह पहला भारत दौरा है।
जयशंकर ने सोशल मीडिया पर अराघची के साथ तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, "आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से विस्तृत बातचीत हुई। उनके साथ मिडिल ईस्ट की स्थिति और उसके प्रभावों पर चर्चा हुई। साथ ही आपसी हित के द्विपक्षीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। ब्रिक्स इंडिया 2026 में उनकी भागीदारी के लिए आभार।"
विदेश मंत्री जयशंकर ने गुरुवार को मिडिल ईस्ट के नाजुक सुरक्षा माहौल पर बात करते हुए कहा कि क्षेत्र में लगातार तनाव, साथ ही समुद्री मार्गों और ऊर्जा अवसंरचना पर मंडरा रहे खतरे वैश्विक चिंता का विषय बने हुए हैं। भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, “मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। लगातार तनाव, समुद्री यातायात पर खतरे और ऊर्जा अवसंरचना में व्यवधान स्थिति की नाजुकता को उजागर करते हैं। होर्मुज स्ट्रेट और लाल सागर सहित अंतर्राष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से सुरक्षित और निर्बाध समुद्री प्रवाह वैश्विक आर्थिक समृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।”
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अंतरराष्ट्रीय संबंधों का आधार बना रहना चाहिए। संवाद और कूटनीति ही संघर्षों के समाधान के एकमात्र स्थायी साधन हैं और भारत भी इसका समर्थन करता है।”
गुरुवार को ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में अपने संबोधन में अराघची ने अमेरिका और इज़रायल की निंदा की। साथ ही वैश्विक समुदाय से अमेरिका और इज़रायल द्वारा अंतर्राष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की निंदा करने और युद्ध भड़काने के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया, जिससे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन करने वालों की दण्डमुक्ति का अंत हो सके।