Infamous 1872 US Elections: अमेरिका में आज राष्ट्रपति चुनाव है जिसकी दुनियाभर में चर्चा हो रही है। कई सालों से चली आ रही इस चुनावी प्रक्रिया में एक ऐसा अमेरिकी चुनाव भी रहा है जो काफी अनोखा था और बाकी चुनावों से हटकर भी।
अमेरिका (United States Of America) में आज, 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव (US Presidential Elections) होंगे। दुनियाभर की नज़रें अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर हैं। 1788–89 में पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव गए थे और उसके बाद से यह सिलसिला शुरू हो गया। अब हर 4 साल में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होते हैं और हर चुनाव की अपनी अहमियत होती है। यूं तो हर बार चुनाव में कुछ न कुछ ऐसा ज़रूर होता है जिसे भूलना आसान नहीं होता, लेकिन 1872 में हुए अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में कुछ बिल्कुल हटके हुआ।
अनोखा था 1872 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव
1872 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अनोखा भी था और हटके भी, क्योंकि उसमें कुछ ऐसा हुआ था जो न पहले कभी हुआ और न ही आगे कभी। दरअसल चुनाव में तत्कालीन राष्ट्रपति यूलिसिस ग्रांट (Ulysses Grant) फिर से राष्ट्रपति बनने के लिए चुनावी मैदान में थे। ग्रांट रिपब्लिक पार्टी से थे और 1872 के चुनाव को जीतकर फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति बनना चाहते थे। चुनाव में उनके सामने थे डेमोक्रेटिक पार्टी से होरेस ग्रीली (Horace Greeley), जो न्यूयॉर्क ट्रिब्यून के संस्थापक और संपादक थे। इस चुनाव में ग्रांट की जीत हुई थी और वह लगातार दूसरी बार अमेरिका के राष्ट्रपति बने। लेकिन पॉपुलर वोटों की गिनती के बाद और इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों से पहले कुछ ऐसा हुआ जिससे 1872 अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव अनोखा बन गया।
ग्रीली की हुई मौत
पॉपुलर वोटों की गिनती के कुछ समय बाद ग्रीली की मौत हो गई। ऐसे में इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों को डालने की बारी आई, तो इलेक्टोरल कॉलेज भी हैरान रह गया कि एक मरे हुए उम्मीदवार के वोटों को कैसे बांटा जाए। ऐसे में इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों के लिए ग्रांट की टक्कर ग्रीली से नहीं, बल्कि मृत ग्रीली से हुई। हालांकि ग्रांट की जीत सुनिश्चित थी, लेकिन ग्रीली की मौत के बाद इलेक्टोरल कॉलेज को उनके वोट दूसरे डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को बांटने पड़े। पॉपुलर वोटों और इलेक्टोरल कॉलेज के वोटों की गिनती के बाद ग्रांट फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बने, लेकिन ग्रीली की बीच में ही मौत होने से इस चुनाव में कुछ ऐसा हो गया, जो न पहले कभी हुआ, न बाद में कभी।
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