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US-Iran War: ‘एक घंटे में तबाह कर दूंगा’, ट्रंप की ईरान को खुली धमकी, IRGC ने भी दिया अल्टीमेटम

US-Iran War: इस्लामाबाद में 21 घंटे की ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता बिना किसी समझौते के विफल हो गई। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस खाली हाथ लौटे। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को एक घंटे में तबाह करने की धमकी दी और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का ऐलान किया। जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी नौसेना को कड़ी चेतावनी देते हुए जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया।
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Apr 12, 2026
TRUMP
यूएस-ईरान वॉर अपडेट: फोटो में अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप (सोर्स: ANI)

hormuz strait blockade: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में दावा किया कि ईरान अंततः अमेरिका की सभी मांगें मान लेगा। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि वे वापस आएंगे और हमें वह सब देंगे जो हम चाहते हैं। मैं सब कुछ चाहता हूं… उनके पास कोई पत्ता नहीं बचा है।" ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी नेतृत्व के पास अब कोई विकल्प नहीं है और वह बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर होगा।

ट्रंप ने पिछले हफ्ते दी गई अपनी कड़ी चेतावनी का भी बचाव किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरी सभ्यता आज रात मर जाएगी और फिर कभी वापस नहीं आएगी। उनका तर्क था कि इसी कड़ी भाषा की वजह से ईरान वार्ता की मेज पर आया। उन्होंने कहा, "उस बयान ने उन्हें वार्ता की मेज तक पहुंचाया और वे उसे छोड़कर नहीं गए।" ट्रंप ने आगे यह भी चेतावनी दी कि वे एक दिन में ईरान को तबाह कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक घंटे के भीतर ईरान के सभी बिजली संयंत्र और पुल नष्ट किए जा सकते हैं, जिसे दोबारा बनाने में दस साल से भी अधिक का समय लगेगा।

इस्लामाबाद वार्ता विफल, वेंस ने छोड़ा पाकिस्तान

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली कठिन वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंची। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस बिना किसी समझौते के पाकिस्तान से रवाना हो गए। रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा, "हमारे बीच कई विषयों पर सहमति बनी थी, यह अच्छी खबर है। लेकिन बुरी खबर यह है कि हम किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सके। यह अमेरिका से ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है।"

वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अपनी "लाल रेखाएं" तय कर दी हैं और वह इनसे पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने बताया कि अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की स्पष्ट और बाध्यकारी प्रतिबद्धता दे, लेकिन तेहरान इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका "बहुत लचीला और समायोजनशील" रहा, फिर भी वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी। अमेरिका ने ईरानी नेतृत्व के सामने अपना "अंतिम और सर्वोत्तम प्रस्ताव" छोड़ा है, जिस पर विचार करने के लिए तेहरान को समय दिया गया है।

दूसरी तरफ, ईरान के सरकारी प्रसारक प्रेस टीवी ने दावा किया कि वार्ता इसलिए विफल हुई क्योंकि अमेरिका ने "अत्यधिक मांगें" रखीं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बाकेई ने कहा कि परमाणु अधिकार और होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद के मुख्य बिंदु रहे। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने "वैध अधिकारों और हितों" की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकेबंदी, ईरान की कड़ी चेतावनी

वार्ता टूटने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा और उकसावे वाला कदम उठाया। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना अब होर्मुज जलडमरूमध्य में प्रवेश करने वाले सभी समुद्री जहाजों को रोकेगी। साथ ही, जो भी जहाज ईरान को पारगमन शुल्क चुका चुके हैं, उन्हें अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ही रोका जाएगा। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने का वादा करके उसे तोड़ा, जिससे दुनियाभर में ऊर्जा संकट और तनाव पैदा हुआ।

ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, हालांकि उन्होंने कहा कि उनकी अधिकांश नौसेना पहले ही नष्ट की जा चुकी है। फारस की खाड़ी में अमेरिका के दो शक्तिशाली विमानवाहक पोत — यूएसएस गेराल्ड फोर्ड और यूएसएस अब्राहम लिंकन — पहले से तैनात हैं, जो इस जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण करने में सक्षम माने जाते हैं।

इस नाकेबंदी की घोषणा के जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उनके नौसेना कमांड ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य "पूरी तरह हमारे नियंत्रण में है।" गार्ड्स ने यह भी चेतावनी दी कि "किसी भी गलत कदम का अंजाम दुश्मन के लिए जलडमरूमध्य में घातक भंवरों में फंसना होगा।"

होर्मुज क्यों है जरूरी

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्ग है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस पर किसी भी तरह की रोक या टकराव का असर वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर तुरंत पड़ सकता है।

इस्लामाबाद वार्ता की विफलता और अमेरिकी नाकेबंदी की घोषणा के बाद दोनों देशों के बीच पहले से कमजोर दो सप्ताह का युद्धविराम और भी अनिश्चित हो गया है। एक तरफ अमेरिका का सख्त रुख और दूसरी तरफ ईरान का अड़ियल तेवर — इस बीच दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति अभी भी रास्ता निकाल सकती है, या यह तनाव किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है।

Updated on:
12 Apr 2026 10:08 pm
Published on:
12 Apr 2026 10:08 pm