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अपने ही देश में रहकर की दुश्मन की मदद, ईरान में 3,000 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार

Iran 's Crackdown On Spies: ईरान में दुश्मन के लिए जासूसी कर रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जारी है। इस मामले में 3,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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Jun 23, 2026
Spies arrested in Iran
ईरान में दुश्मन के लिए जासूसी कर रहे लोग गिरफ्तार (File Photo)

ईरान (Iran) और अमेरिका (United States Of America) के बीच शांति समझौता (Iran-US Peace Deal) होने से युद्ध का स्थायी अंत हो गया है। दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत भी शुरू हो गई है। इस युद्ध में ईरान ने काफी नुकसान झेला है, जो सिर्फ अमेरिका और इज़रायल (Israel) के हमलों की वजह से नहीं, बल्कि देश में ही रह रहे गद्दारों की वजह से भी हुआ है। हम बात कर रहे हैं जासूसों की, जिनके खिलाफ ईरान की कार्रवाई जारी है।

3,000 से ज़्यादा लोग गिरफ्तार

ईरान की न्यायपालिका ने सोमवार को जानकारी दी कि पिछले कुछ महीनों में दुश्मन की मदद करने के आरोप में 3,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने बताया कि देश में पिछले कुछ महीनों में 3,292 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से 684 लोगों ने इज़रायल की मदद करते हुए युद्ध में ऑपरेशनल गतिविधियों को अंजाम दिया था। इसके अलावा 1,258 लोगों पर सरकार के खिलाफ राजनीतिक प्रचार करने का आरोप है और गिरफ्तार किए गए लोगों में से 1,061 के ख़िलाफ अब तक आरोप तय किए जा चुके हैं।

मोसाद के संपर्क में थे कई लोग

गिरफ्तार किए गए कई लोग इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद (Mossad) के संपर्क में थे और ईरान की खुफिया जानकारी लीक कर रहे थे, जिससे ईरान को काफी नुकसान हो रहा था। इसके अलावा कई जासूस ग्राउंड लेवल पर भी ईरान के दुश्मनों की मदद कर रहे थे, जिसका खामियाजा युद्ध के मैदान में ईरान को भुगतना पड़ रहा था।

100 गद्दारों की संपत्तियाँ जब्त

हाल ही में आईजानकारी के अनुसार पिछले कुछ महीनों में हुई गिरफ्तारियों के साथ ही मुकदमों और संपत्ति जब्त करने के मामले भी देखने को मिले हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पिछले हफ्ते न्यायपालिका ने जानकारी दी कि इस्फहान प्रांत में 100 गद्दारों की संपत्तियाँ कब्ज़े में ली गई है।

मिल सकती है सख्त सज़ा

ईरान में रहते हुए दुश्मनों की मदद करते हुए देश के साथ गद्दारी करने वालों को सख्त सज़ा मिल सकती है। गंभीर अपराध को अंजाम देने वालों को मौत की सज़ा भी भुगतनी पड़ सकती है।