ईरान ने बहरीन पर मिसाइल हमला किया है और एमेजन के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया है। बहरीन सरकार ने इस हमले की पुष्टि की है।
ईरान ने बहरीन में मौजूद एमेजॉन के हेडक्वार्टर पर मिसाइल हमला किया है जिससे बैटेलको हेडक्वार्टर की बिल्डिंग को भारी नुकसान पहुंचा है। यह बिल्डिंग बहरीन के हमाला में स्थित है। बैटेलको, बहरीन की सबसे बड़ी टेलीकम्युनिकेशन कंपनी है और एमेजॉन वेब सर्विसेज़ के बुनियादी ढांचे को होस्ट करती है। बहरीन सरकार ने इस हमले की पुष्टि की है। गौरतलब है कि ईरान ने मंगलवार को ही धमकी दी थी कि 1 अप्रैल से मिडिल ईस्ट में अमेरिकी कंपनियों को निशाना बनाया जाएगा और अब इसकी शुरुआत हो गई है।
ईरान का एमेजन हेडक्वार्टर पर यह हमला इस बात का संकेत है कि मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर डिजिटल और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर तक पहुंच गया है। हाल के घटनाक्रमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टेक्नोलॉजी अब सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि रणनीतिक हथियार बन चुकी है। हमले से पहले ही ईरान ने बयान जारी करते हुए कई अमेरिकी और क्षेत्रीय टेक कंपनियों को निशाना बनाने की चेतावनी दी थी। इस चेतावनी के बाद अब ईरान ने एमेजन पर हमला कर दिया है। ईरान के इस हमले ने वैश्विक टेक इंडस्ट्री और खासकर खाड़ी क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट में 18 प्रमुख कंपनियों की सूची जारी की गई थी, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, एप्पल, मेटा, ओरैकल, इंटेल, आईबीएम और एनवीडिया जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल थी। इसके अलावा यूएई की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी G42 और दुबई स्थित साइबर सिक्योरिटी फर्म स्पायर सॉल्यूशंस का नाम भी शामिल था। ईरान ने दावा किया था कि ये कंपनियां आतंकी जासूसी गतिविधियों में शामिल हैं और इनके क्षेत्रीय यूनिट्स को निशाना बनाया जा सकता है। चेतावनी में कर्मचारियों को अपने ऑफिस छोड़ने की सलाह भी दी गई थी।
मौजूदा संघर्ष में टेक्नोलॉजी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। क्लाउड सर्विस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सैटेलाइट डेटा और डेटा सेंटर अब युद्ध की रणनीति का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हाल ही में यूएई और बहरीन में क्लाउड डेटा सेंटर पर ड्रोन हमलों से सेवाओं में बाधा आई, जिससे यह साफ हो गया कि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर भी अब सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा जीपीएस सिग्नल में छेड़छाड़ और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर के मामले भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे एयरक्राफ्ट, शिपिंग और मोबाइल एप्स प्रभावित हुए हैं। यह दिखाता है कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ जमीन या आसमान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि डिजिटल दुनिया में भी लड़ा जाएगा।
बढ़ते खतरे को देखते हुए कई टेक कंपनियों ने अपने ऑपरेशन में बदलाव शुरू कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियों ने कर्मचारियों को रिमोट वर्क अपनाने और यात्रा सीमित करने की सलाह दी है। साथ ही कई कंपनियों ने इमरजेंसी प्लान एक्टिव कर दिए हैं ताकि किसी भी संभावित हमले से नुकसान को कम किया जा सके। G42 जैसी कंपनियां, जो हेल्थकेयर, क्लाउड और स्पेस टेक्नोलॉजी में काम करती हैं, क्षेत्रीय डिजिटल इकोसिस्टम का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में इन पर खतरा पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और टेक विकास को प्रभावित कर सकता है।