
Ayatollah Ali Khamenei Red Coffin: एक लाल रंग का ताबूत 5 शहर और दो देश- ईरान और इराक। जो कभी एक दूसरे के दुश्मन थे। खून के प्यासे थे। लेकिन ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के जनाजे ने दोनों को एक कर दिया। लाखों लोगों के बीच से ईरान से निकला जनाजा इराक के नजफ पहुंचा। जिसे पूरी दुनिया ने देखा। उनका ताबूत लाल रंग से ढका हुआ था। आसपास लाल झंडे भी लहराते दिखाई दिए। जिन पर लिखा था- ‘KILL TRUMP’,
इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर इस लाल रंग का मतलब क्या है? क्या यह सिर्फ परंपरा है या इसके पीछे कोई बड़ा संदेश छिपा है? आइए जानते हैं शिया समुदाय में लाल ताबूत और लाल झंडे का क्या महत्व माना जाता है।
शिया परंपरा में लाल रंग को शहादत और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि जब किसी की हत्या को अन्यायपूर्ण माना जाए और उसका बदला अभी बाकी हो, तब लाल झंडा फहराया जाता है। इसी वजह से लाल ताबूत और लाल झंडों को कई लोग न्याय और प्रतिशोध के प्रतीक के रूप में देखते हैं। हालांकि यह किसी आधिकारिक युद्ध की घोषणा नहीं होती।
शिया समुदाय की धार्मिक मान्यताओं में लाल झंडा यह संदेश देता है कि शहीद के खून का हिसाब अभी बाकी है। इसका ये भी मतलब होता है कि खून का बदला खून से लिया जाएगा। इसलिए जब किसी जनाजे में लाल रंग प्रमुखता से दिखता है, तो इसे खास संदेश माना जाता है। यही वजह है कि खामेनेई के जनाजे में लाल ताबूत और झंडों ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया और इनके मायनों को लेकर चर्चा तेज हो गई।
अली खामेनेई के जनाजे के बाद से ट्रंप एक्शन मोड में हैं। उन्होंने ईरान को सख्त चेतावनी दी है कि अगर उनकी हत्या की कोई भी कोशिश की गई, तो अमेरिका ईरान पर बड़े पैमाने पर जवाबी हमला करेगा।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को निशाना बनाने के लिए 1,000 मिसाइलें पहले से तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर हजारों और मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अमेरिकी सेना को पहले ही आदेश दिए जा चुके हैं। उनका कहना है कि अगर ईरान ने कोई कदम उठाया, तो लंबे समय तक चलने वाली सैन्य कार्रवाई की जाएगी।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका और ट्रंप के खिलाफ नारे लगाए जाने की खबरें सामने आईं। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि एक पोस्टर में ट्रंप को गोली लगने वाली तस्वीर दिखाई गई थी।
इधर, अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ईरान की ओर से ट्रंप को कथित खतरे से जुड़ी सूचनाओं की जांच कर रही हैं। हालांकि, कुछ अधिकारियों का कहना है कि अभी तक किसी ठोस साजिश के पक्के सबूत नहीं मिले हैं। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे मिडिल-ईस्ट में हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है।