
Iran-Russia banking relations : अमेरिका के जंग खत्म करते ही ईरान ने मौके का फायदा उठाते हुए रूस की ओर रुख किया है। ईरान-रूस बैंकिंग रिश्तों पर चर्चा के लिए ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर मॉस्को गए हैं। दरअसल ईरान-रूस के वित्तीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बैंक प्रमुख मॉस्को के लिए रवाना हुए। ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती मंगलवार सुबह एक प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में मॉस्को के लिए रवाना हुए। इस यात्रा का मकसद ईरान और रूस के बीच मौद्रिक और बैंकिंग संबंधों में विस्तार करना है। अमेरिका ईरान समझौते के बावजूद ईरान का यह एक मौन संदेश है कि दुनिया में अमेरिका ही अकेली सुपर पॉवर नहीं है और वह यूएस से डरता या दबता नहीं है और वह जिस देश के साथ चाहेगा, रिश्ते रखेगा और जिससे चाहेगा नहीं रहेगा, ऐसा करते हुए अमेरिका की परवाह नहीं करेगा।
ध्यान रहे कि ईरान ने समझौते की प्राइमरी डील पर दस्तखत किए हैं, लेकिन इसकी कुछ शर्तें अभी भी गोपनीय हैं। उधर अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि आईएईए ईरान लौट जाएगा और तेहरान के साथ 60 दिनों की वार्ता के दौरान होर्मुज में कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। ईरानी मीडिया के अनुसार, अमेरिका की ओर से नौसैनिक नाकाबंदी हटाने के बाद तीन ईरानी तेल टैंकर और दो मालवाहक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं।
पिछले एक दशक के दौरान रूस और ईरान के संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं, विशेष रूप से 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से इनमें उल्लेखनीय गतिशीलता देखी गई है। रूस-ईरान के द्विपक्षीय संबंधों को परंपरागत रूप से सहयोग व प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जाता रहा है। अलबत्ता 1990 के दशक की शुरुआत से इन संबंधों में काफी सुधार हुआ है। वहीं सन 2010 के दशक के मध्य में सैन्य मामलों में बढ़ते सहयोग के साथ-साथ आर्थिक हितों का कुछ हद तक तालमेल शामिल था। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बाद से द्विपक्षीय संबंध बहुत गहरे हो गए हैं।
यूक्रेन और सीरिया में चल रहे मौजूदा संघर्षों के साथ-साथ रूस और ईरान पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के प्रभाव ने द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए प्रमुख प्रेरक शक्ति का काम किया है। तेहरान के साथ मॉस्को के संबंधों पर पहले से मौजूद प्रतिबंध विशेष रूप से परमाणु मुद्दों और द्वितीयक प्रतिबंधों पर कम हो गए हैं, हालांकि मॉस्को अभी भी सतर्क है। यह संभावना है कि इज़राइल-हमास युद्ध अल्पावधि से मध्यम अवधि में द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की इस प्रवृत्ति को और मजबूत करेगा।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रूस-ईरान संबंधों में आर्थिक संबंध परंपरागत रूप से एक कमजोर कड़ी ही रहे हैं, हालांकि, 2022 में यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के बाद से मॉस्को और तेहरान ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के विकास में काफी निवेश करना शुरू कर दिया है। इस सहयोग में नए व्यापार समझौते, बैंकिंग क्षेत्रों का घनिष्ठ एकीकरण, सीमा पार व्यापार में वृद्धि और कई रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश में वृद्धि शामिल है।
बहरहाल रूस-ईरान रिश्ते समय के साथ और गहरे होने की संभावना है, खासकर तब तक जब तक दोनों देश पश्चिमी देशों और पश्चिमी प्रभुत्व वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रति शत्रुतापूर्ण और विरोधी रुख अपनाए रहेंगे। फिर भी, रूस के साथ पूर्ण मेल-मिलाप ईरानी अधिकारियों के लिए विवादास्पद बना हुआ है, जिनके पास द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की इस प्रवृत्ति को नियंत्रित करने की क्षमता है।