अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान को कड़ी चेतावनी के साथ बड़ा सैन्य कदम उठाया है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला परमाणु-संचालित विमानवाहक स्ट्राइक ग्रुप अब दक्षिण चीन सागर से हटाकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है।
ईरान में दिसंबर 2025 से जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों ने अब पूरे देश को हिला दिया है। राष्ट्रीय मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने, महंगाई के आसमान छूने और जीवनयापन के संकट ने जनता का गुस्सा चरम पर पहुंचा दिया है। इन विरोध प्रदर्शनों को अब एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह का रूप मिल चुका है, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ गया है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने ईरान को कड़ी चेतावनी के साथ बड़ा सैन्य कदम उठाया है। पेंटागन ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि USS अब्राहम लिंकन के नेतृत्व वाला परमाणु-संचालित विमानवाहक स्ट्राइक ग्रुप अब दक्षिण चीन सागर से हटाकर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के क्षेत्र में तैनात किया जा रहा है। इस ग्रुप में कई युद्धपोत, डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और कम से कम एक हमलावर परमाणु पनडुब्बी शामिल है।
अमेरिकी प्रसारक न्यूज़ नेशन के अनुसार, यह तैनाती ईरान में बढ़ती अशांति और तेहरान की ओर से अमेरिका को मिल रही धमकियों के जवाब में की गई है। स्ट्राइक ग्रुप को मिडिल ईस्ट के क्षेत्र तक पहुंचने में लगभग एक सप्ताह का समय लगेगा। CENTCOM का दायरा अफ्रीका और एशिया के बड़े हिस्से को कवर करता है, जिसमें फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल हैं।
ईरान में प्रदर्शनकारियों की संख्या लाखों में पहुंच चुकी है। प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के इस्तीफे, आर्थिक सुधारों और राजनीतिक स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। ईरानी सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई में 3,428 मौतें और हजारों गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। तेहरान ने इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों द्वारा प्रायोजित बताया है और अमेरिका-इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है।
ट्रंप प्रशासन ने पहले ही कई बार ईरान को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों पर अत्याचार जारी रहा तो अमेरिका मजबूत कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान में फांसी और हत्याएं रुकनी चाहिए, वरना ईरान बहुत परेशान होगा। इस सैन्य तैनाती को विशेषज्ञ अमेरिका का मास्टरस्ट्रोक बता रहे हैं, जो ईरान को सैन्य दबाव में लाने के साथ-साथ क्षेत्रीय सहयोगियों (जैसे सऊदी अरब, UAE और इजरायल) को भी संदेश देता है।