
Iran Claims US Attacked 95 Sites: मिडिल ईस्ट में सुलग रही चिंगारी अब एक भीषण आग का रूप लेती जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव इस कदर चरम पर पहुंच गया है कि दोनों देश एक-दूसरे के खून के प्यासे नजर आ रहे हैं। ईरान ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है कि अमेरिकी सेना ने पिछले 10 दिनों में उस पर एक या दो नहीं, बल्कि पूरे 95 विनाशकारी हमले किए हैं। तेहरान प्रशासन के मुताबिक, इन ताबड़तोड़ हवाई हमलों में कम से कम 8 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है और भारी तबाही मची है।
ईरानी मीडिया और वहां के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने मुख्य रूप से उनके बुनियादी ढांचे (Civilian Infrastructure), संचार प्रणालियों और रणनीतिक पुलों को निशाना बनाया है। इस आक्रामक कार्रवाई से दक्षिणी प्रांतों में हाहाकार मचा हुआ है और कई रिहायशी इलाकों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने लगातार कई रातों तक ईरान के दक्षिणी तटीय इलाकों में बमबारी की है। होर्मुजगान प्रांत में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कम से कम 6 पुलों को मलबे में तब्दील कर दिया गया, जो ईरान के सबसे बड़े बंदरगाह 'बंदर अब्बास' को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ते थे। इसके अलावा चाबहार बंदरगाह पर स्थित एक समुद्री निगरानी टावर (Maritime Surveillance Tower) को भी अमेरिकी मिसाइलों ने उड़ा दिया। अमेरिका का आरोप है कि इस टावर का इस्तेमाल ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) अंतरराष्ट्रीय जहाजों को ट्रैक करने और उन पर हमले की साजिश रचने के लिए कर रही थी।
अमेरिकी हमलों से तिलमिलाए ईरान ने भी चुप न बैठने का फैसला किया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन में मौजूद अमेरिकी हवाई ठिकाने 'शेख ईसा एयर बेस' और कुवैत में अमेरिकी नौसेना के एक फ्यूल सपोर्ट पियर को ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। कुवैत और कतर जैसे देशों को भी ईरान की इस आक्रामकता का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जहां सुरक्षा अलर्ट जारी कर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को रोकना पड़ा है।
इस पूरे विवाद की जड़ें इतिहास और वर्तमान के कई जटिल समीकरणों से जुड़ी हैं।
स्ट्रैट ऑफ होर्मुज पर कब्जा: दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी संकरे समुद्री रास्ते से होती है। ईरान ने यहां अपना नियंत्रण मजबूत करने के लिए व्यापारिक जहाजों की नाकेबंदी करने की कोशिश की, जिससे अमेरिका भड़क उठा।
प्रॉक्सी वॉर और हमास-हिजबुल्लाह कनेक्शन: अमेरिका का पुराना आरोप है कि ईरान मिडिल ईस्ट में हमास, हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों जैसे गुटों को हथियारों और पैसों की सप्लाई कर पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है।
परमाणु कार्यक्रम का खौफ: अमेरिका और इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना चाहते हैं। पूर्व में दोनों पक्षों के बीच समझौते की कोशिशें भी हुईं, लेकिन वे बेनतीजा रहीं और आपसी अविश्वास की खाई गहरी होती चली गई।