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Iran Breaks MoU: ईरान का ऐलान: समझौते की हर शर्त खत्म, अब नहीं निभाएगा कोई वादा

Iran latest news: ईरान ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ हुआ समझौता अब उसके लिए समाप्त हो चुका है। इस घोषणा के बाद पश्चिम एशिया में कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि दुनिया की नजर अब दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Jul 18, 2026

Iran Breaks MoU

Iran Breaks MoU : ईरान ने पहली बार किया स्पष्ट ऐलान, समझौते को माना खत्म (फोटो सोर्स:@visionergeo)

Iran US MoU:ईरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह इस समझौते की किसी भी शर्त को अब लागू नहीं करेगा। ईरान के उप विदेश मंत्री और तकनीकी वार्ता दल के प्रमुख काज़ेम ग़रीबाबादी ने कहा कि अमेरिका ने व्यवहारिक रूप से समझौते के तहत किए गए सभी दायित्वों का उल्लंघन किया है और उसे पूरी तरह निष्प्रभावी बना दिया है। ऐसे में ईरान भी अपने सभी दायित्वों से पीछे हट रहा है।

यह पहली बार है जब तेहरान ने आधिकारिक रूप से कहा है कि यह समझौता अब समाप्त हो चुका है और उसकी किसी भी धारा का पालन नहीं किया जाएगा। इससे पहले ईरानी अधिकारी लगातार अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे थे, लेकिन समझौते को पूरी तरह खत्म घोषित नहीं किया था।

'कागज का टुकड़ा बनकर रह गया समझौता' – ईरान का करारा जवाब

इस भीषण सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान के उप-विदेश मंत्री और तकनीकी वार्ता टीम के प्रमुख काज़ेम गरीबाबादी ने आधिकारिक बयान जारी कर दुनिया को चौंका दिया। गरीबाबादी ने कहा, "अमेरिका ने व्यवहार में इस्लामाबाद समझौता (Memorandum of Understanding) के सभी वादों को तार-तार कर दिया है और इसे पूरी तरह निलंबित कर दिया है। जब अमेरिका खुद इन नियमों को नहीं मान रहा, तो हम क्यों मानें? ईरान भी अब इस समझौते की किसी भी शर्त को मानने के लिए बाध्य नहीं है।"

यह पहली बार है जब ईरान ने खुले तौर पर यह स्वीकार किया है कि अब बातचीत के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं और वे केवल अपनी मातृभूमि की रक्षा में जुटे हैं।

क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका

ईरान के इस रुख से पहले ही तनावपूर्ण बने पश्चिम एशिया में हालात और जटिल हो सकते हैं। हाल के वर्षों में अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास लगातार बढ़ा है। प्रतिबंध, सैन्य गतिविधियां और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों ने दोनों देशों के रिश्तों को पहले ही बेहद संवेदनशील बना दिया है।

यदि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े रहते हैं तो भविष्य में नई वार्ताओं की संभावनाएं कमजोर पड़ सकती हैं। साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक तेल बाजार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बढ़ी चिंता

दुनिया के कई देश लंबे समय से चाहते रहे हैं कि अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए अपने मतभेद दूर करें। लेकिन ईरान के इस नए आधिकारिक रुख ने यह संकेत दिया है कि फिलहाल दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना आसान नहीं होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास जल्द शुरू नहीं हुए तो तनाव और बढ़ सकता है, जिसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक सुरक्षा और आर्थिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।

क्या है इस्लामाबाद MoU और क्यों सुलग रहा है खाड़ी देश?

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच बीते कई दशकों से परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद चल रहा है। साल 2015 में हुए परमाणु समझौते (JCPOA) से जब 2018 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पीछे हटे थे, तब से यह तनातनी जारी है। इसके बाद कूटनीतिक रास्तों को खुला रखने के लिए 'इस्लामाबाद समझौता (MoU)' एक अहम कड़ी था, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की उम्मीद थी।

अब बुशहर जैसे संवेदनशील न्यूक्लियर प्लांट पर सीधे हमले ने स्थिति को बेकाबू कर दिया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने अपने परमाणु रिएक्टरों की सुरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद किया, तो दुनिया भर में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे वैश्विक मंदी का खतरा पैदा हो जाएगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक ताकतों पर टिकी हैं कि क्या वे इस संभावित तीसरे विश्व युद्ध को रोक पाते हैं या नहीं।