ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ने अपने 10,000 नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए 'कंटीजेंसी प्लान' सक्रिय कर दिया है। शुक्रवार को पहला जत्था स्वदेश लाया जा सकता है।
ईरान में लगातार बढ़ते तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, सरकारी दमन से हजारों मौतें और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हमले की धमकियों के बीच भारत सरकार ने वहां फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए 'कंटीजेंसी' प्लान तैयार कर लिया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को भारतीयों का पहला जत्था स्वदेश लाया जा सकता है। एक अनुमान के अनुसार, ईरान में वर्तमान में 10,000 से अधिक भारतीय रह रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या छात्रों की है। ईरान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे कश्मीर के सैकड़ों छात्रों के परिवारों में भारी घबराहट है।
सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया कि तेहरान में भारतीय दूतावास ने विभिन्न क्षेत्रों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों से संपर्क शुरू कर दिया है, ताकि ये पता लगाया जा सके कि कौन देश छोड़ना चाहता है। हालांकि, इंटरनेट सेवाओं के कई इलाकों में बंद होने और फोन लाइनों के सीमित अवधि में ही काम करने के कारण ये प्रक्रिया भौतिक रूप से की जा रही है। सरकारी सूत्रों ने दावा किया कि वे सभी भारतीय छात्रों के संपर्क में हैं और जल्द से जल्द चार्टर्ड उड़ानों की व्यवस्था करने की कोशिश कर रहे हैं। प्राथमिकता उन क्षेत्रों को दी जा रही है जो हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित हैं।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि उन्होंने ईरान की स्थिति के बारे में विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की। जयशंकर ने आश्वासन दिया कि ईरान में मौजूद जम्मू-कश्मीर के छात्रों और अन्य लोगों के हितों और जान की सुरक्षा के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
इससे पहले बुधवार को ईरान में लगातार बिगड़ते हालत को देखते हुए भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी जारी कर सभी भारतीय नागरिकों-छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों से उपलब्ध साधनों या कमर्शियल फ्लाइट्स के जरिए ईरान छोड़ने की अपील की थी। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने, सतर्क और संबंधित यात्रा डॉक्यूमेंट्स तैयार रखने की सलाह दी है।
श्रीनगर के प्रेस कॉलोनी में परिजनों ने प्रदर्शन कर पीएम मोदी से बच्चों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगाई है। माता-पिता को डर है कि अमरीका और इजरायल के संभावित हमलों से स्थिति और बिगड़ सकती है। छात्र वर्तमान में रसद की कमी और असुरक्षित संचार व्यवस्था से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।