विदेश

ईरान सरकार का सख्त रुख, जनवरी में विरोध प्रदर्शन करने वाले 2 युवकों को फांसी पर लटकाया

Iran execution 2026: ईरान में जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों में शामिल दो युवकों जावेद जमानी और अबोलफजल सईदी को शाहरुद में फांसी दे दी गई। मोहारे बेह के आरोप में सख्त कार्रवाई हुई है।

2 min read
Jun 16, 2026
Mojtaba Khamenei
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई। (फोटो- X)

ईरान में जनवरी 2026 के विरोध प्रदर्शनों को लेकर सरकार की सख्ती अब और बढ़ गई है। शाहरुद इलाके में दो युवकों को फांसी दे दी गई है। न्यायपालिका की खबर एजेंसी मिजान ने इसकी पुष्टि की। इन युवकों को 'हथियारबंद नेताओं' के रूप में बताया गया है।

बता दें कि जनवरी 2026 में ईरान के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। लोग महंगाई, बेरोजगारी और कुछ नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे। सरकार ने इन्हें 'अशांति' बताया और सुरक्षा बलों ने सख्ती से निपटा।

हिंसा से भारी नुकसान हुआ

शाहरुद काउंटी में भी हिंसा हुई, जहां संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और सुरक्षा बलों के साथ टकराव हुआ। इसी बीच जावेद जमानी और अबोलफजल सईदी पर आरोप लगे कि वे इन प्रदर्शनों में हथियारबंद नेतृत्व कर रहे थे।

कोर्ट ने उन्हें मोहारे बेह (ईश्वर के खिलाफ युद्ध), जमीन पर भ्रष्टाचार, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराधों का दोषी ठहराया। मिजान न्यूज ने बताया कि दोनों को इन गंभीर आरोपों में फांसी की सजा सुनाई गई और उसे लागू भी कर दिया गया।

क्या है कोर्ट का फैसला

ईरानी अदालतों में ऐसे मामलों की सुनवाई तेज होती है। दोनों आरोपियों को नियमित अदालत की बजाय फास्ट ट्रैक अदालत में पेश किया गया। मुकदमे में गवाहों के बयान, वीडियो सबूत और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट को आधार बनाया गया।

मोहारे बेह जैसे आरोप ईरान में बहुत गंभीर माने जाते हैं। इसके तहत मौत की सजा आम है। प्रदर्शनकारियों पर अक्सर यही धारा लगाई जाती है।

जावेद जमानी और अबोलफजल सईदी पर आरोप था कि उन्होंने न सिर्फ भीड़ को उकसाया बल्कि हथियारों का भी इस्तेमाल किया। संपत्ति को आग लगाने और सुरक्षा बलों पर हमले के आरोप भी लगे।

ईरान में फांसी की बढ़ती संख्या

यह फांसी ईरान में इस साल की कई ऐसी घटनाओं में से एक है। जनवरी के प्रदर्शनों के बाद से सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों मौतें भी हुईं।

सरकार कहती है कि ये कार्रवाई कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे दमन बताते हैं।मानवाधिकार कार्यकर्ता चिंता जता रहे हैं कि ऐसे मुकदमों में उचित सुनवाई नहीं होती।

वकीलों को पर्याप्त समय नहीं मिलता और कई बार यातनाओं के आरोप भी लगते हैं। ईरान में मौत की सजा का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध को कुचलने के लिए किया जाता है, ऐसा कई संगठनों का कहना है।

दुनिया की प्रतिक्रिया

इस घटना पर अमेरिका, यूरोपीय देशों और संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। कुछ देशों ने ईरान से फांसी रोकने की अपील की। वहीं ईरानी सरकार कहती है कि यह उसका आंतरिक मामला है और कोई बाहरी दखल नहीं बर्दाश्त करेगी।

ईरान के अंदर भी कई परिवारों में गुस्सा है। प्रदर्शनकारियों के रिश्तेदार कहते हैं कि उनके लोग सिर्फ अधिकार मांग रहे थे, लेकिन उन्हें मौत की सजा दे दी गई।

Updated on:
16 Jun 2026 04:19 pm
Published on:
16 Jun 2026 03:57 pm