
अमेरिका-ईरान समझौते पर पूर्व राष्ट्रीय सलाहकार बोल्टन ने उठाए सवाल (Photo-IANS)
Middle East Conflict: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान के हमलों से हुए नुकसान के बीच अमेरिका कुछ बड़ा कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूएस जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का इस्तेमाल खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई और रिकंस्ट्रक्शन के लिए कर सकता है।
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन यह एनालिसिस (आकलन) कर रहा है कि ईरान के हमलों से खाड़ी देशों को कितना नुकसान हुआ और क्या जब्त फंड से उसकी भरपाई संभव है। अगर यह प्लान आगे बढ़ती है, तो अमेरिका-ईरान संबंधों में और भी कड़वाहट आ सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सीजफायर है। अमेरिका की तरफ से बार-बार शांति समझौते पर जोर दिया जा रहा है। उधर ईरान भी अपनी शर्तों को मनवाने में लगा हुआ है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका सिर्फ फ्रीज किए गए एसेट्स ही नहीं, बल्कि अन्य ईरानी संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।
यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहसेन रेज़ाई ने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी शांति समझौते की प्रगति इस बात पर निर्भर करेगी कि वॉशिंगटन 24 अरब डॉलर की फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति को रिलीज करता है या नहीं।
वहीं ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान के हमलों से हुए नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन यह भी जांच रहा है कि क्या इन संपत्तियों का उपयोग भविष्य के पुनर्निर्माण के साथ-साथ पहले हुए नुकसान की भरपाई के लिए भी किया जा सकता है।
इसमें तेल इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत का खर्च भी शामिल हो सकता है, जिसे पहले ईरान या उसके समर्थित समूहों ने निशाना बनाया था। सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और बहरीन जैसे देशों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान का भी आकलन किया जा रहा है।
ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों को ट्रांसफर करने की अमेरिकी योजना से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ सकता है। हाल ही में अमेरिकी सेना ने ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसके बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। हालांकि अमेरिका का कहना है कि अधिकांश मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया गया।
कुवैत और बहरीन ने इन हमलों की निंदा की है। इस बीच, ईरान चाहता है कि उस पर लगे तेल निर्यात प्रतिबंधों में ढील दी जाए और उसके अरबों डॉलर के फ्रीज किए गए फंड जारी किए जाएं। इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, जिससे शांति वार्ता और सीजफायर पर दबाव बढ़ सकता है।
Updated on:
7 Jun 2026, 8:57 AM IST
Published on:
7 Jun 2026, 8:36 AM IST
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