
Masoud Pezeshkian: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश के नए रक्षा मंत्री के लिए मेहरदाद अखलाकी केताबची का नाम प्रस्तावित किया है। मेहरदाद लंबे समय से ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। दरअसल, ईरान के पूर्व रक्षा मंत्री अजीज नासिरजादेह अमेरिका और इजरायल के हमले के दौरान मारे गए थे। तब से रक्षा मंत्रालय विभाग कार्यवाहक मंत्री के भरोसे ही चलाया जा जा रहा है।
मेहरदाद अखलाकी केताबची पर यूरोपीय संघ ने प्रतिबंध लगाया है। वह अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में भी शामिल हैं। वह शहीद बाघेरी इंडस्ट्रियल ग्रुप के प्रमुख रहे हैं। ईरान की मिसाइल प्रोग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए उन्हें प्रतिबंधों की सूची में डाला गया है।
हांलाकि, मेहरदाद की बतौर रक्षा मंत्री पद पर नियुक्ति के लिए संसद में विश्वास मत हासिल करना जरूरी है।
अमेरिका संग जारी संघर्ष के बीच ईरानी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमीनिया ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि ईरान के पास नए सैन्य उपकरणों का बड़ा भंडार है। ईरानी सरकारी टीवी ने कहा कि जारी युद्ध के बीच मिसाइलों और ड्रोन समेत रक्षात्मक और आक्रामक हथियारों का उत्पादन चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नए हथियार सही समय आने पर सामने लाए जाएंगे।
वहीं, मध्य पूर्व में तनाव की वजह से कच्चे तेल में कीमतों में मामूली तेजी भी देखी जा रही है। कच्चे तेल की कीमत 27 सेंट की तेजी के साथ 100.59 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। फिलिप नोवा की मार्केट इनसाइट्स प्रमुख प्रियंका सचदेवा के मुताबिक, शिपिंग डेटा बताता है कि सितंबर के आखिर में कई दिन क्षेत्र का कच्चा तेल निर्यात युद्ध से पहले के स्तर से भी ऊपर रहा। वैकल्पिक रास्तों और लॉजिस्टिक्स में बदलाव से उत्पादक होर्मुज के आसपास की बाधाओं के बावजूद तेल भेजते रहे।
हालांकि उनका कहना है कि आपूर्ति के पूरी तरह सामान्य होने की बात अभी कहना ठीक नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास टैंकरों पर फिर हमले हुए हैं और हाल के दिनों में ऐसी घटनाएं बढ़ी हैं। यानी तेल पहुंच तो रहा है, लेकिन ढुलाई की लागत, बीमा, रूट और सुरक्षा जोखिम अब भी ऊंचे हैं।
आंकड़ों के अनुसार, ईरान को छोड़कर खाड़ी देशों का तेल प्रवाह सितंबर में युद्ध से पहले के स्तर के 81 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसमें सऊदी अरब के निर्यात में सुधार की बड़ी भूमिका रही, जबकि सऊदी तेल ढांचे पर हमले हुए और क्षेत्रीय जहाजरानी पर ईरानी हमले बढ़े। दूसरी ओर, अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान का तेल निर्यात शून्य पर आ गया।