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इजरायल को सता रहा ईरानी हमले का डर, रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Iran Israel Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के बीच क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, ईरान संभावित मिसाइल या ड्रोन हमले को अंजाम दे सकता है।

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May 22, 2026
ईरान इजरायल वॉर (ANI)

US Iran Israel War 2026: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष युद्धविराम (Ceasefire) वार्ता के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, ईरान खाड़ी देशों और इजरायल को निशाना बनाकर अचानक मिसाइल या ड्रोन हमला कर सकता है। यह चिंता तब और गंभीर हो गई है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान संभावित अमेरिकी या इजरायली कार्रवाई से पहले ही हमला कर सकता है।

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इजरायल में सुरक्षा समीक्षा तेज

जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के रक्षा मंत्री बिनी गंत्ज (Benny Gantz) और वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने संभावित ईरानी हमले की आशंका पर सुरक्षा समीक्षा बैठक की। इजरायली वायुसेना और डिफेंस फोर्सेज (IDF) के ऑपरेशंस निदेशालय ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ संदिग्ध ईरानी सैन्य गतिविधियों की निगरानी और खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया। लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर (Eyal Zamir) ने सेना अधिकारियों के साथ संभावित हमले और जवाबी कार्रवाई दोनों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में सैन्य समन्वय और रणनीतिक तैयारी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।

ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना सबसे बड़ा खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बार-बार कहा है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार क्षमता हासिल करने नहीं देगा। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास लगभग 900 पाउंड उच्च संवर्धित यूरेनियम मौजूद है, जिसे हथियार निर्माण के लिए परिष्कृत किया जा सकता है। यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल दोनों, तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर सुरक्षा चुनौती मानते हैं।

खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता का खतरा

हालिया सैन्य समीक्षा में अमेरिका और इजरायल ने मिसाइल पहचान और इंटरसेप्शन सिस्टम को और मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों ने तकनीकी समन्वय, सॉफ्टवेयर अपडेट और सैनिक सहयोग को बढ़ाया है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि पिछले एक महीने में अमेरिका ने इजरायल को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति बढ़ा दी है। विश्लेषकों का मानना है कि वार्ता विफल होने की स्थिति में पश्चिम एशिया में व्यापक सैन्य टकराव की संभावना बढ़ सकती है, जिससे खाड़ी देशों की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

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