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ट्रंप के चीन दौरे के बाद पलटा खेल! अमेरिका ने ताइवान को 14 बिलियन के हथियारों की बिक्री पर लगाई रोक

US-Taiwan Weapons Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कुछ दिन पहले ही चीन के दौरे से वापस लौटे हैं। अब अमेरिका ने ताइवान को 14 बिलियन डॉलर्स के हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी है। क्या है पूरा मामला? आइए नज़र डालते हैं।

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भारत

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Tanay Mishra

May 22, 2026

Donald Trump, Xi Jinping and Lai Ching-te

Donald Trump, Xi Jinping and Lai Ching-te

चीन (China) और ताइवान (Taiwan) मुद्दे पर अमेरिका (United States of America) ने हमेशा ही ताइवान का साथ दिया है। इस वजह से चीन और अमेरिका के बीच भी तनाव बढ़ा है। चीन से रक्षा के लिए अमेरिका ने ताइवान को हथियारों की सप्लाई को भी ग्रीन सिग्नल दिया है। हालांकि चीन ने हमेशा ही इसका विरोध किया है। इसी बीच अब अमेरिका ने ताइवान को 14 बिलियन डॉलर्स के हथियारों की बिक्री के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।

ईरान युद्ध की वजह से हथियारों की बढ़ी ज़रूरत

अमेरिकी नेवी के कार्यवाहक सचिव हंग काओ (Hung Cao) ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि इस रोक का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अमेरिकी सेना के पास ईरान युद्ध के लिए पर्याप्त मात्रा में हथियारों का भंडार मौजूद रहे।

अमेरिका के पास हथियारों की हुई कमी?

काओ ने यह भी साफ किया कि अमेरिका के पास काफी मात्रा में हथियार हैं। हालांकि कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका के हथियारों का भंडार कम हो गया है, जो काफी चिंताजनक है। काओ ने यह भी कहा कि जब प्रशासन को ज़रूरी लगेगा, तब विदेशी सैन्य बिक्री का सिलसिला फिर से शुरू हो जाएगा।

ट्रंप के चीन दौरे के बाद पलटा खेल!

कई एक्सपर्ट्स यह अनुमान लगा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के चीन दौरे के बाद खेल पलट गया है। चीन-ताइवान मुद्दे पर ट्रंप और चाइनीज़ राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच काफी विस्तार से चर्चा हुई थी। जिनपिंग ने इस दौरान ट्रंप को साफ तौर पर बता दिया था कि इस मामले में असहमति से चीन और अमेरिका के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही जिनपिंग ने ट्रंप को इस मामले में दखल न देने के लिए भी कहा था।

क्या है चीन-ताइवान विवाद की वजह?

चीन और ताइवान 1949 में एक-दूसरे से अलग हो गए थे। तभी से ताइवान अपना स्वतंत्र अस्तित्व मानता है और खुद को एक स्वतंत्र देश बताता है। कई अन्य देश भी ताइवान को एक स्वतंत्र देश मानते हैं। वहीं चीन इसका विरोध करता है और ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। चीन कई मौकों पर साफ कर चुका है कि ताइवान का चीन में विलय होकर रहेगा। इसी वजह से दोनों देशों में विवाद चल रहा है और स्थिति काफी तनावपूर्ण हो चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चीन खुफिया तरीके से ताइवान पर हमला करने का प्लान बना रहा है। हालांकि चीन की तरफ से अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की गई है।