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ईरान के राष्ट्रपति का बड़ा बयान: ‘डिप्लोमेसी के लिए हम तैयार हैं, लेकिन अमेरिका को छोड़नी होगी अपनी जिद’

Masoud Pezeshkian on US Sanctions: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा कि देश कूटनीति के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपना रवैया बदलना होगा। जानें क्या कुछ कहा है?

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Apr 30, 2026
Masoud Pezeshkian on US Sanctions (Image: IANS)

Iran US War Update: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ संकेत दिया है कि उनका देश कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को अपनी नीतियों में बदलाव करना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में तनाव कम करने का एकमात्र रास्ता बातचीत है, लेकिन यह तभी संभव है जब अमेरिका आक्रामक और उकसाने वाले कदमों से पीछे हटे।

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अमेरिका के रवैये पर सख्त टिप्पणी

जापान की प्रधानमंत्री सनई ताकाइची के साथ फोन पर हुई बातचीत में पेजेशकियान ने अमेरिका और इजराइल पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता के पीछे इन्हीं देशों की नीतियां जिम्मेदार हैं। ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिकी कार्रवाई को समुद्री डकैती तक करार दिया और कहा कि ईरानी जहाजों को निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए।

जापान ने जताई चिंता

इस बातचीत में जापानी जहाजों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठा है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता जल्द फिर शुरू होगी और किसी समझौते तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि सभी देशों के जहाजों के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना जरूरी है, खासकर तब जब फारस की खाड़ी में कई जापानी जहाज और नागरिक मौजूद हैं।

अंतर्राष्ट्रीय कानून का हवाला

मसूद पेजेशकियान ने पर्शियन गल्फ नेशनल डे के मौके पर अपने बयान में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह की नाकेबंदी या प्रतिबंध अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। उनका मानना है कि ऐसे कदम न केवल क्षेत्रीय देशों के हितों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी खतरा बनते हैं।

असफल वार्ता के बाद बढ़ा तनाव

गौरतलब है कि अप्रैल के मध्य में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन यह वार्ता किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इसके बाद से ही क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। ईरान के इस ताजा बयान से साफ है कि वह बातचीत के लिए दरवाजे खुले रखना चाहता है, लेकिन अब आगे की दिशा काफी हद तक अमेरिका के रुख पर निर्भर करेगी।

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