US-Iran Talks: ईरान ने अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार करते हुए कहा कि पहले फ्रेमवर्क समझौते करें फिर बातचीत होगी।
Iran US Face-to-Face Talks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल अमेरिका के साथ सीधे बातचीत करने के लिए तैयार नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वॉशिंगटन की अत्यधिक मांगें इस गतिरोध की सबसे बड़ी वजह हैं।
तुर्की के अंटाल्या में बोलते हुए ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने बताया कि दोनों देशों के बीच फिलहाल बातचीत सीधे नहीं, बल्कि संदेशों के जरिए चल रही है। उन्होंने कहा, हम अभी उस स्थिति में नहीं पहुंचे हैं कि औपचारिक बैठक की ओर बढ़ सकें, क्योंकि कुछ अहम मुद्दों पर अमेरिका अपने कड़े रुख से पीछे नहीं हटा है।
खातिबजादेह ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका नहीं भेजेगा। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान के परमाणु स्थलों से सामग्री वापस लेगा। उन्होंने दो टूक कहा, कोई भी संवर्धित सामग्री अमेरिका नहीं भेजी जाएगी। यह हमारे लिए शुरुआत से ही अस्वीकार्य है।
ईरानी अधिकारी ने अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इन अवैध एकतरफा प्रतिबंधों को खत्म किए बिना आगे बढ़ना मुश्किल है। उन्होंने कहा, दूसरे पक्ष को हमारी मुख्य चिंताओं को समझना और उनका समाधान करना होगा।
ईरान ने यह भी साफ किया कि किसी भी आमने-सामने की बैठक से पहले एक फ्रेमवर्क समझौता जरूरी है। यानी बातचीत से पहले दोनों पक्षों को बुनियादी शर्तों पर सहमति बनानी होगी।
खातिबजादेह के अनुसार, क्षेत्र में ईरान की गतिविधियां पूरी तरह रक्षात्मक हैं। उन्होंने इसे लेबनान में इजरायल और हिज़्बुल्लाह के बीच जारी तनाव से भी जोड़ा। उन्होंने कहा, ईरान के पास आक्रांताओं को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
ईरान ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज को लेकर एक नया प्रोटोकॉल बातचीत का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह मार्ग सभी नागरिक जहाजों के लिए खुला और सुरक्षित रहेगा।