Hormuz Strait transit fee: ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बीच होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े नए विवाद और शुल्क नीति पर तेहरान के फैसले, ट्रंप की चेतावनी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रहे असर की ताजा जानकारी।
Hormuz Strait transit fees: अमेरिका और ईरान के बीच 7 अप्रैल से दो सप्ताह के लिए जारी युद्ध विराम के बीच तेहरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए बड़ी घोषणा की है। इसके मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख का कहना है कि संसदीय प्रस्ताव के तहत, होर्मुज स्ट्रेट से पारगमन शुल्क राष्ट्रीय मुद्रा रियाल में भुगतान किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी शुक्रवार को मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास के एक पोस्ट में दी गई है।
खास बात यह है कि ईरान की तरफ से यह जानकारी ऐसे वक्त में दी गई, जब पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ युद्ध विराम लागू होने के बाद पहली बैठक होने जा रही है। इस बैठक से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते तेल की शिपमेंट को सीमित करके युद्ध विराम की सहमति का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इसके साथ ही, राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों से शुल्क वसूलने के खिलाफ चेतावनी दी थी।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कहा था कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों के गुजरने की अनुमति देने में बहुत खराब काम कर रहा है। कुछ लोग इसे बेईमानी भी कह सकते हैं। हमारा समझौता ऐसा बिल्कुल नहीं था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह टिप्पणी उन मीडिया रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें कहा गया है कि युद्ध विराम लागू होने के बाद से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सिर्फ कुछ ही जहाज गुजर पाए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
ईरान से बातचीत करने के लिए अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस पाकिस्तान के लिए रवाना हो गए हैं। रवानगी से पहले उन्होंने ईरान को चेतावनी दी कि ईमानदारी से बातचीत करें, खेल नहीं खेलें। तेहरान गुड फेथ में वार्ता करेगा तो अमेरिका भी खुले तौर पर बातचीत को तैयार है। यदि उसने चालाकी की कोशिश की तो अमेरिकी टीम सख्त रुख अपनाएगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई से ईरान बेहद नाराज है। ऐसे में बैठक को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अभी तक ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं पहुंचा है।