Ceasefire: ईरान ने तेहरान टाइम्स के जरिए जंग खत्म करने के लिए 5 बड़ी शर्तें रखी हैं। हमलों और हत्याओं पर रोक न लगने पर ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में बड़ी तबाही की चेतावनी दी है।
Conflict : ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी विनाशकारी युद्ध (War 2026) अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। तेहरान ने शांति बहाली के लिए (Peace Proposal) की दिशा में अपनी 5 कड़ी शर्तें दुनिया के सामने रखी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) और बी-52 बॉम्बर्स (B-52 Bombers) की तैनाती के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। तेहरान टाइम्स (Tehran Times) के मुताबिक, यदि हमलों और हत्याओं का सिलसिला तुरंत नहीं रुका, तो खाड़ी क्षेत्र में 'प्रलय' आ सकती है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि शांति की बात तभी होगी जब अमेरिका और इजरायल उसके क्षेत्र में जारी हवाई हमलों और शीर्ष नेतृत्व की लक्षित हत्याओं (Targeted Assassinations) को पूरी तरह बंद कर देंगे। तेहरान का कहना है कि बिना युद्ध विराम के बातचीत की मेज पर बैठना मुमकिन नहीं है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उसके अधिकारियों को निशाना बनाना बंद नहीं किया गया, तो वह अपने जवाबी हमलों की तीव्रता कई गुना बढ़ा देगा।
ईरानी शासन ने केवल आज के युद्ध विराम की बात नहीं की है, बल्कि भविष्य के लिए भी ठोस कानूनी गारंटी (Legal Guarantees) मांगी है। उनकी शर्त है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र यह सुनिश्चित करें कि भविष्य में ईरान की संप्रभुता पर कभी कोई हमला नहीं होगा। तेहरान का मानना है कि अमेरिका पहले भी समझौतों से पीछे हट चुका है, इसलिए इस बार उसे लिखित और वैश्विक गारंटी चाहिए।
जंग के दौरान ईरान के बुनियादी ढांचे, तेल डिपो और सैन्य ठिकानों को जो नुकसान पहुँचा है, उसकी भरपाई के लिए तेहरान ने युद्ध क्षतिपूर्ति (Financial Compensation) की शर्त रखी है। ईरान की मांग है कि अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस विनाश की आर्थिक जिम्मेदारी लें। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने खरबों डॉलर के हर्जाने का दावा पेश किया है ताकि वह अपने ध्वस्त हो चुके तंत्र को दोबारा खड़ा कर सके।
ईरान की चौथी शर्त यह है कि जंग केवल ईरानी सीमाओं तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। उसने मांग की है कि पूरे मध्य पूर्व (Middle East) में उसके सहयोगियों और प्रतिरोध समूहों (Resistance Groups) जैसे हिजबुल्लाह के खिलाफ भी सभी सैन्य अभियान तुरंत रोके जाएं। ईरान का तर्क है कि जब तक उसके पूरे 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' को सुरक्षा नहीं मिलती, तब तक क्षेत्र में स्थाई शांति संभव नहीं है।
सबसे विवादास्पद शर्त होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर है। ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपने पूर्ण संप्रभु अधिकार और नए कानूनी शासन की मांग की है। वह चाहता है कि दुनिया इस रास्ते पर ईरान के वर्चस्व को मान्यता दे, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा नियंत्रित होता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा, जिससे पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट (Energy Crisis) पैदा हो जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ये शर्तें ट्रंप प्रशासन के लिए "अस्वीकार्य" हो सकती हैं, क्योंकि अमेरिका ईरान की मिसाइल शक्ति को पूरी तरह खत्म करना चाहता है। फिलहाल पाकिस्तान और तुर्की इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं, लेकिन 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत बी-52 विमानों की बमबारी अभी भी जारी है। इस युद्ध के कारण भारत में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल पार कर गई हैं, जिससे घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की महंगाई का खतरा बढ़ गया है।