
Iran Strait of Hormuz Proposal: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने के मकसद से पेश किए गए अपने सात-दिन के रोडमैप प्रस्ताव पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया पर ध्यान दिया है, लेकिन अभी तक किसी मध्यस्थ के जरिए कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला है। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट दी है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के सात-दिन के युद्धविराम (Ceasefire) के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अरागची ने कहा कि ईरान कोई अंतिम फैसला लेने से पहले मध्यस्थों से अमेरिका का औपचारिक रुख जानने का इंतजार कर रहा है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का कोई भी कदम तेहरान की शर्तों के पूरा होने पर ही निर्भर करेगा। उन्हें साफ कहा कि, हमारी शर्तें स्पष्ट हैं, और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की दिशा में कोई भी कदम इन शर्तों के पूरा होने पर ही निर्भर करता है। उन्होंने आगे कहा, केवल बातचीत से निकला समाधान ही उन्हें इस गतिरोध से बाहर निकाल सकता है।
ट्रंप ने समुद्री व्यापार के एक अहम रास्ते से जुड़ी प्रस्तावित क्षेत्रीय व्यवस्था को खारिज करने की बात दोहराई है और अहम शिपिंग लेन से जुड़ी शर्तों को नकार दिया है। ईरान के सरकारी स्टूडेंट न्यूज नेटवर्क (SNN) की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने जोर देकर कहा, मैं इस समझौते को खारिज करता हूं।" उन्होंने आगे कहा, वे चाहते हैं कि एक ऐसा समझौता हो जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोल दिया जाए, क्योंकि वे बुरी तरह विफल हो रहे हैं।
अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देने वाली रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नवंबर के मध्यावधि चुनावों (midterms) के बाद ईरान पर बमबारी फिर से शुरू होगी। यह बात इस हफ्ते की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान ईरान को खत्म करने की उनकी खुली धमकी के बाद आई है।
गुरुवार को अरागची ने कहा था कि ईरान ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को खत्म करने के लिए सात-दिन की योजना का प्रस्ताव दिया है। इस योजना का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक बातचीत शुरू करना भी होगा। अरागची ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में पत्रकारों से कहा कि यह प्रस्ताव उस MoU (समझौता ज्ञापन) जैसा ही है जो इस साल जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुआ था।