
Iran Supreme Leader Mojtaba Khamenei Vowed Pledged to Avenge : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडरअयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने का संकल्प लिया है। मोजतबा ने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर पोस्ट किए गए एक लिखित संदेश में कहा कि अपने दिवंगत पिता, पूर्व सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या का बदला लेना 'पूरे देश की मांग' है और इसे 'निश्चित रूप से' अंजाम दिया जाना चाहिए। ध्यान रहे कि खामेनेई के जनाजे में शामिल लाखों लोगों ने एक मत से कहा क ईरान को डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू से खामेनेई की हत्या का बदला लेना चाहिए।
खामेनेई ने यह संदेश अपने पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह के अवसर पर जारी किया, जो 28 फरवरी को अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों में मारे जाने के महीनों बाद बहुत बड़े स्तर पर आयोजित किया गया था। खामेनेई ने संदेश में कहा,' हम शहीद नेता और इन दोनों युद्धों के सभी शहीदों के खून का उन अपराधी और कलंकित हत्यारों से बदला लेने का संकल्प लेते हैं । उन्होंने कहा, 'चाहे हम यहां हों या न हों, यह टारगेट हासिल किया जाएगा, और जल्द ही दुनिया भर में स्वतंत्रता चाहने वालों में से प्रत्येक व्यक्ति इस दिव्य मिशन के एक हिस्से को पूरा करेगा।'
ध्यान रहे कि 28 फरवरी, 2026 को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई और उनके परिवार के कई सदस्य मारे गए थे। इसके बाद, ईरान और इराक में 4 जुलाई से 9 जुलाई तक लंबे समय तक अंतिम संस्कार और जुलूस निकाले गए, जिनमें लाखों लोग शामिल हुए बाद में उन्हें मशहद में इमाम रज़ा दरगाह में दफनाया गया। ईरान की सरकार ने 1 मार्च, 2026 को आधिकारिक तौर पर उनकी मौत की पुष्टि की, जिससे राष्ट्रीय शोक शुरू हुआ।
तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के शुरुआत में मार्च के लिए तय किए गए अंतिम संस्कार के प्लान में समय और टाइम जोन की दिक्कतों के कारण बदलाव करना पड़ा। इसके बाद अंतिम संस्कार का शेड्यूल बदला गया, जो 4 जुलाई से 9 जुलाई, 2026 तक छह दिनों तक चला। अंतिम संस्कार का जुलूस कई शहरों से होकर गुजरा।
4-5 जुलाई: उनकी पार्थिव देह को लाखों आम लोगों के दर्शन के लिए तेहरान की इमाम खुमैनी मस्जिद में रखा गया।
6 जुलाई: तेहरान की सड़कों पर एक आधिकारिक सार्वजनिक अंतिम संस्कार जुलूस निकाला गया।
7 जुलाई: पवित्र शहर कोम में जुलूस निकाले गए।
8 जुलाई: इराक ले जाया गया, जहाँ नजफ और कर्बला के पवित्र शहरों में जुलूस निकाले गए।
9 जुलाई: ईरान वापस लाया गया, जहाँ मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह में उनके पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
ईरान और इराक में हजारों से लेकर लाखों गुस्साए और शोक संतप्त लोग कई दिनों तक चले अंतिम संस्कार समारोहों में भाग लेने के लिए सड़कों पर उतर आए और वे जोर-जोर से सीना पीटते हुए और नारे लगाते हुए दिखे। अंत्येष्टि जुलूसों में अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ खुलेआम बदला लेने की अपीलें की गईं। पोस्टरों और बैनरों पर ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या कर खामेनेई से बदला लेने पर जोर दिया गया। इन सभाओं और कट्टरपंथियों के ट्रंप पर पलटवार करने की कसमें खाने से तनाव बढ़ा।