
Iran America Deal: संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से ईरान ने अमेरिका के सामने कूटनीतिक रास्ता खोलने की कोशिश की है। तेहरान चाहता है कि वॉशिंगटन नवंबर के अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले उस समझौते (MoU) में वापस आए, जो क्षेत्रीय तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को दोबारा खोलने से जुड़ा था। ईरान-अमेरिका संबंधों में बढ़ती तल्खी के बीच यह पहल पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम संकेत मानी जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान ईरान ने अमेरिका के साथ फिर से कूटनीतिक बातचीत की इच्छा जताई है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि तेहरान चाहता है कि अमेरिका नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनावों से पहले उस समझौते (MoU) में वापस आए, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और रणनीतिक समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलना था।
समाचार एजेंसी अल जज़ीरा (Al Jazeera) की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेशकियन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के मौके पर कहा कि ईरान अमेरिकी प्रशासन से इस समझौते की दिशा में दोबारा कदम उठाने की उम्मीद करता है। यह MoU अगस्त के मध्य में समाप्त हो गया था, जिसके बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंताएं बढ़ गई हैं।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। खाड़ी देशों से निकलने वाले तेल और गैस के बड़े हिस्से का परिवहन इसी समुद्री रास्ते से होता है। किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
इसी बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में पश्चिम एशिया संकट को लेकर कई देशों ने अपनी चिंताएं रखीं। फिलिस्तीनी प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने अपने संबोधन में कहा कि इजरायल की नीतियां अब केवल दो-राष्ट्र समाधान की संभावनाओं को प्रभावित नहीं कर रहीं, बल्कि फिलिस्तीनियों के अस्तित्व से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।
वहीं, कतर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें दोहा पर इजरायल के खिलाफ जनमत प्रभावित करने का अभियान चलाने का आरोप लगाया गया था। कतर ने इन दावों को पूरी तरह अस्वीकार किया।
नेतन्याहू ने UNGA में ईरान के परमाणु ठिकानों पर कार्रवाई को लेकर अपने रुख को दोहराया। उनके भाषण के दौरान कई देशों के राजनयिकों के सभागार से बाहर जाने की खबर भी सामने आई।
दूसरी ओर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि उनका देश सऊदी अरब के यानबू बंदरगाह की सुरक्षा के लिए सैनिक और रक्षा प्रणालियां भेजेगा। यह क्षेत्र ऊर्जा परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
यमन में हूती समूह को लेकर भी तनाव जारी है। यमनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, मोखा और ताइज इलाकों में हूती ठिकानों को निशाना बनाया गया। वहीं, 80 देशों के एक समूह ने संयुक्त राष्ट्र में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को तत्काल खोलने की मांग करते हुए क्षेत्रीय हमलों और व्यापार बाधाओं पर चिंता जताई।
इजरायल-हमास संघर्ष को लेकर भी बयानबाजी तेज रही। हमास ने नेतन्याहू के UN संबोधन को खारिज करते हुए उन पर गलत दावे करने का आरोप लगाया और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों का हवाला दिया।
कुल मिलाकर, संयुक्त राष्ट्र महासभा में पश्चिम एशिया संकट के कई पहलू सामने आए, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच MoU को लेकर उठी पहल ने वैश्विक कूटनीति का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।