
Masoud Pezeshkian Statement: ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव के बीच तेहरान ने एक बार फिर संकेत दिया है कि वह लंबे संघर्ष का इच्छुक नहीं है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने कहा है कि युद्ध समाप्त करने का फैसला अब अमेरिका को करना होगा। उनके इस बयान ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू कर दी है, क्योंकि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर मतभेद लगातार बने हुए हैं।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियां ने अमेरिका को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अगर वॉशिंगटन चाहे तो ईरान के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त किया जा सकता है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के अनुसार, पेजेशकियां ने अमेरिकी टीवी चैनल फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम "स्पेशल रिपोर्ट विद ब्रेट बेयर" में बातचीत के दौरान कहा कि ईरान संघर्ष को आगे बढ़ाना नहीं चाहता, लेकिन इसे खत्म करने का निर्णय अमेरिका को लेना होगा।
पेजेशकियां का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने कहा था कि तेहरान अमेरिकी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। वहीं, अमेरिका की ओर से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि कोई समझौता नहीं होता है तो ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
मौजूदा संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने भी इजरायल और उन खाड़ी देशों को निशाना बनाया था जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इस सैन्य टकराव में हजारों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापित होने की बात सामने आई है।
इस विवाद का सबसे संवेदनशील मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमताओं को कमजोर करना है। हालांकि, ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं कर रहा। तेहरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य होने के नाते शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक विकसित करने के अपने अधिकार का हवाला देता है।
पेजेशकियां के बयान को कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें ईरान ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन साथ ही यह संदेश भी दिया है कि वह अमेरिकी शर्तों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।