Donald Trump: अमेरिका की खुफिया एजेंसी ने डोनाल्ड ट्रंप और उनके चुनाव अभियान को अलर्ट करर दिया है, वहीं इस देश का नाम सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियों ने भी ट्रंप पर हुए हमलों से कड़ी जोड़कर इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दी है।
Donald Trump: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 2 महीने में 2 बार हत्या की कोशिश की जा चुकी है। डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करने पर कौन तुला हुआ है, इसका खुलासा अभी तक नहीं हुआ है लेकिन इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसे सुनकर हर किसी के होश फाख्ता हो गए। दरअसल अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने खुलासा किया है कि ईरान, (Iran) अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और वर्तमान में राष्ट्रपति उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप की हत्या करना चाहता है।
ट्रंप की चुनावी अभियान के संचार निदेशक स्टीवन च्यांग ने बयान दिया है कि डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रीय खुफिया निदेशालय ने ईरान से उनकी हत्या के प्रयासों के बारे में जानकारी दी है। खुफिया अधिकारी लगातार इस तरह के हमलों की जांच कर रहे हैं जो बीते महीनों में बढ़े हैं। अब सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियां डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा सुनिश्चित करने और नवंबर के चुनावों में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से बचने के लिए काम कर रही हैं।
ईरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या क्यों करना चाहता है, इसका जवाब देते हुए स्टीवन च्यांग ने कहा कि ईरान पर डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान कई तरह के प्रतिबंध लगे हैं। ईरान का आतंकवादी शासन कमला हैरिस की कमजोरी को पसंद करता है और राष्ट्रपति ट्रंप की ताकत और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों से डरा हुआ है। इसलिए ईरान अमेरिका की इस ताकत को खत्म करना चाहता है।
जब से इजरायल ने गाजा में हमास के खिलाफ और ईरान, हिजबुल्लाह के खिलाफ जंग छेड़ी है, डोनाल्ड ट्रंप लगातार इजरायल का समर्थन करते दिखे हैं। उन्होंने कई मंचों से खुले तौर पर इजरायल को अपना समर्थन दिया है। जिससे ईरान तिलमिलाया हुआ है। ईरान ने कई बार कहा है कि गाज़ा में और लेबनान-ईरान में तबाही मचाने के लिए अमेरिका ही इजरायल की मदद कर रहा है, और ट्रंप भी इजरायल का समर्थन करते दिखते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत से ही ईरान की नीतिय़ों को खिलाफ रहे हैं। इसी के चलते अमेरिका ने डोनाल़्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल में साल 2018 में ईरान के साथ परमाणु समझौते रद्द कर दिया था इस समझौते का नाम था जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA)। इसे ईरान न्यूक्लियर डील भी कहा जाता है। इसके बाद अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध दोबारा लगा दिए, जिन्हें ‘मैक्सिमम प्रेशर कैंपेन’ कहा गया।
इन नए प्रतिबंधों में ईरान के तेल और गैस निर्यात पर, ईरान के सेंट्रल बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं पर, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से जुड़े व्यक्तियों और कंपनियों पर, स्टील, एल्यूमिनियम, कॉपर, और आयरन सेक्टर पर, सरकार, खास तौर पर ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उसके नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। IRGC को एक आतंकी संगठन भी घोषित किया गया था। इसके अलावा ईरान की एयरलाइन्स और शिपिंग कंपनियों पर अमेरिका ने ट्रंप के कार्यकाल में बैन लगा दिया गया था।
अमेरिका के इन प्रतिबंधों से ईरान की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और ईरान की जनता पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ा। इसलिए ईरान, अमेरिका से खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप पर तमतमाया हुआ है।
डोनाल्ड ट्रंप पर पहला असफल हत्या का प्रयास 13 जुलाई को पेंसिल्वेनिया में एक रैली के दौरान हुआ था, जब एक गोली उनके कान के पास से गुजरी थी। दूसरा प्रयास 15 सितंबर को फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच में ट्रंप इंटरनेशनल गोल्फ क्लब में हुआ। बता दें कि अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव 5 नवंबर को होने जा रहे हैं, जिसमें ट्रंप का सामना डेमोक्रेटिक पार्टी की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार उपराष्ट्रपति कमला हैरिस से होगा।