
Iran War Updates: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब समुद्री रास्तों और तेल ढांचे पर भी साफ दिखाई देने लगा है। यमन में ईरान समर्थित हूती लड़ाकों की लाल सागर के तटीय इलाकों में बढ़त के बीच सऊदी अरब ने अपने ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन संचालन को एहतियाती तौर पर रोक दिया है। इसी दौरान इराक से कथित तौर पर छोड़े गए ड्रोन से सऊदी तेल ढांचे पर हमले ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंता बढ़ा दी है। घटनाक्रम ने लाल सागर से लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य तक तनाव को और गंभीर बना दिया है।
सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर लगातार ड्रोन हमलों के बाद रियाद ने फिलहाल पाइपलाइन को बंद रखने का फैसला किया है। यह कदम तत्काल सैन्य जवाब देने के बजाय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी नेतृत्व ने इराकी अधिकारियों को संभावित हमलों पर नियंत्रण के लिए समय देने का विकल्प चुना है।
बहरीन ने हमले की तीखी आलोचना की है। अल जजीरा के अनुसार, बहरीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ड्रोन इराकी क्षेत्र से छोड़े गए थे। मंत्रालय के मुताबिक हमले में लोग घायल हुए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। बहरीन ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स (Reuters) की रिपोर्ट के मुताबिक, इराकी अधिकारियों ने शलामचेह सीमा पार केंद्र को बंद करने का निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया। रॉयटर्स ने दो इराकी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि यह कार्रवाई सऊदी अरब की तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद की गई।
हमले के बाद बगदाद ने जिम्मेदार लोगों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए व्यापक सुरक्षा अभियान शुरू किया है। इराक का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसकी जमीन किसी दूसरे देश के खिलाफ हमलों के लिए इस्तेमाल हो।
मक्का स्थित मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने भी सऊदी तेल प्रतिष्ठान पर हुए ड्रोन हमलों की निंदा की है। संगठन के महासचिव मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-ईसा के हवाले से कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई धार्मिक मूल्यों के साथ-साथ मानवीय और अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है। संगठन ने सऊदी अरब को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का समर्थन दिया।
इसी बीच यमन में हूती लड़ाकों की गतिविधियों ने संकट का दूसरा मोर्चा खोल दिया है। तटीय शहरों और पेरिम द्वीप पर उनकी बढ़त से लाल सागर के लंबे समुद्री क्षेत्र पर उनका प्रभाव बढ़ने की बात सामने आई है। बाब-अल-मंदेब दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है, जहां किसी भी बड़े व्यवधान का असर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है।
हालांकि हूती पक्ष की ओर से कहा गया है कि लाल सागर और बाब-अल-मंदेब में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और व्यवस्थित बनी हुई है।
उधर ईरान ने ओमान में इराक और खाड़ी देशों के साथ सुरक्षित वाणिज्यिक नौवहन पर बातचीत की तैयारी की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने भी होर्मुज क्षेत्र में समुद्री यातायात को लेकर अपनी कार्रवाई तेज की है और कई वाणिज्यिक जहाजों को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़े जाने की जानकारी दी है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग लंबे समय तक तनाव से प्रभावित रहेंगे। यदि तेल प्रतिष्ठानों और समुद्री व्यापार पर हमले बढ़ते हैं, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।